रामलीला मंच पर मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती , नक्कटैया और सीता हरण का हुआ मंचन
संकल्प सवेरा जौनपुर विकास खण्ड मछलीशहर के ग्राम बामी में रामलीला मंच के पात्रों ने महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई। प्रति वर्ष शरद पूर्णिमा को वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। शासन स्तर से इस वर्ष 20 अक्टूबर को आजादी के अमृत महोत्सव को ध्यान में रखते हुए धार्मिक स्थलों पर वाल्मीकि जयंती मनाने और हनुमान चालीसा का पाठ करने का आदेश था। जैसे ही मुख्य पुरोहित अनिल उपाध्याय ने मन्त्रोंत्चार शुरू किया रामलीला समिति बामी के प्रबंधक शैलेन्द्र सिंह ने महर्षि
वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्ज्वलित किया तत्पश्चात पूरे रामलीला पण्डाल में भारी संख्या में मौजूद दर्शकों ने खडे होकर महर्षि वाल्मीकि का जय घोष किया। इसके बाद सभी पात्रों ने बारी-बारी से महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया तथा वहा मौजूद संगीत मंडली ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। मुख्य पुरोहित अनिल उपाध्याय ने लोगों से कहा कि मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है। आज हमारे जीवन का आधार रामायण है और वाल्मीकि उसके रचनाकार थे। पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा रामलीला मंचन और राम के जीवन दर्शन के वहीं स्रोत हैं। क्षेत्र में यह पहला अवसर है कि जब किसी गांव के रामलीला मंच पर महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गयी हो। तत्पश्चात

रामलीला का मंचन प्रारंभ हुआ वन में सूपर्णखा राम को देखकर उन पर मोहित हो जाती है और उनको रिझाने के लिए सुंदरी का रूप धारण करके उनके पास जाती है और उनसे शादी का प्रस्ताव रखती है लेकिन राम मना कर देते है वह लक्ष्मण के पास जाती है लक्ष्मण भी मना कर देते हैं । बार-बार वह दोनों भाइयों से शादी का आग्रह करती है और बार-बार मना करने पर उसका धैर्य जवाब दे जाता है , वह क्रोधित होकर पुनः राक्षसी के रूप में आ जाती है , सीता पर झपटती है। इस पर लक्ष्मण उसकी नाक काट देते है और वह रोती बिलखती अपने भाई खर- दूषण के पास जाती है । बदला लेने के लिए खर – दूषण अपनी सेना लेकर राम के पास आते हैं लेकिन वे दोनों युद्ध में मारे जाते हैं । इसके बाद सूपर्णखा रावण के पास जाती है
और सारा वृत्तांत बताती है । रावण कहता है कि एक अकेली ताकत ने इतने लोगों का संहार किया इसका मतलब स्पष्ट होता है कि नारायण ने स्वयं अवतार लिया है लेकिन सूपर्णखा की कटी नाक का मैं बदला अवश्य लूंगा । यह कहकर वह मामा मारीच के पास जाता है और स्वर्ण मृग बनकर सीता के छल करने में मदद करने को कहता है । सीता स्वर्ण मृग को देखकर उसे पकड़ने के लिए राम से कहती हैं राम मृग के पीछे-पीछे दूर जंगल में निकल जाते हैं। ‘
हाय लक्ष्मण ‘ ‘हाय लक्ष्मण ‘ की आवाज सुनकर सीता लक्ष्मण को राम के पास जाने की जिद करती हैं लेकिन लक्ष्मण वन में जाने से पूर्व कुटी के बाहर एक रेखा खींच देते हैं और सीता को रेखा के अंदर रहने को कहकर जंगल चले जाते हैं। सीता को अकेला पाकर रावण साधु के भेष में भिक्षा मांगने आता हैं और सीता जी से रेखा के बाहर आकर भिक्षा देने को कहता हैं । सीता जैसे ही रेखा के बाहर आती हैं, रावण अपने असली रूप में आ जाता है और सीता जी का हरण कर लेता है। इस अवसर पर भारी संख्या में क्षेत्रवासी रामलीला पंडाल में दर्शक के रूप में मौजूद रहे।












