जौनपुर में भाजपा जिला पंचायत सदस्य नीलम सिंह के बगावती तेवर से चुनाव बना रोमांचक
भाजपा व अपनादल संयुक्त गठबंधन की भूमिका पर सवाल उठने शुरू
रिपोर्ट:- राजीव पाठक
संकल्प सवेरा,जौनपुर। विधानसभा 2022 के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे पंचायती चुनाव के आखिरी राउंड अर्थात जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिये हर पार्टी काफी फूंक फूंक कर कदम रख रही है,वही जौनपुर में अध्यक्ष पद लिये भाजपा की नीलम सिंह ने बगावती तेवर अपनाते हुए शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
ऐसे में जहाँ भाजपा के बगावती सुर उठने से पूरे प्रदेश में हड़कम्प मच गया तो वहीं नीलम सिंह द्वारा भाजपा के साथ होने की बात कहने से गठबंधन की भूमिका पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं।
सूत्रों की मानें तो भाजपा के विधायकों ने जिले की सीट गठबंधन को देने की नाराजगी में शनिवार को डाक बंगले में होने वाली बैठक को स्थगित कर दिया।सूत्रों की मानें तो अब ये बैठक रविवार को होगी।
शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष की दावेदारी के लिये पांच महिला उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया।
आंकड़ो और पूर्व के सभी राजनैतिक बयानों पर गौर करें तो एक तरफ जहां सपा से निशि यादव तो वहीं निर्दल श्रीकला धनंजय सिंह ही ऐसी प्रत्याशी रहीं जो शुरू में दिए गए बयानों के अनुसार मैदान में हैं,जबकि तीनों अन्य प्रत्याशी महज 24 से 48 घण्टे के अदंर मैदान में उतरीं हैं।
अप्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत चुने जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष को चुनने का अधिकार सीधे आम मतदाता को नही होता बल्कि मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए जिला पंचायत सदस्य जिले की सबसे बड़ी पंचायत के अध्यक्ष को चुनते हैं।एक तरफ जहां राजनैतिक पार्टियां इसे विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देख रही है
तो वही जनपद में दो पूर्व सांसदों व एक जिला पंचायत अध्यक्ष के परिवार के लिए यह प्रतिष्ठा की कुर्सी हो गयी है।इस सीट की प्रतिष्ठा का आंकलन करें तो एक तरफ जहां सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव की बहू निशि यादव को मैदान में उतारकर अपने पूर्व दावे और एकजुटता का संदेश दिया तो वही भाजपा ने अंतिम समय पर यह सीट गठबंधन धर्म की मजबूरी बताकर अपना दल को सौंप दी।
सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी अपना दल एस ने नामांकन दाखिले से महज चौबीस घण्टे पहले अपने प्रत्याशी की घोषणा कर मैदान में इस दावे के साथ उतार दिया कि उनके पास 50 सदस्यों का समर्थन है जबकि उसके इस दावे की हवा निकालते हुए उसके गठबंधन की सहयोगी भाजपा की नीलम सिंह ने निर्दल नामांकन करके बगावत का ना सिर्फ विगुल फूंक दिया बल्कि नीलम सिंह के श्वसुर पूर्व सांसद हरिबंश सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि अपना दल की प्रत्याशी तो किसी और को जिताने के लिये खड़ी हुई हैं ।
इस बगावत से अपना दल एस व भाजपा गठबंधन के उस 50 सदस्यों के समर्थन के दावे को करारा झटका लगा क्योंकि अब भाजपा के कुल जीते 10 सदस्य व अपना दल के 6 सदस्यों के ही सारे वोट इस गठबंधन प्रत्याशी को मिल पाएंगे,
इसकी चर्चा आमजन के जुबान पर भी आ गयी।वही अपना दल एस से ही एक अन्य प्रत्याशी ने भी नामांकन करके सभी को चौका दिया,हालांकि पार्टी सूत्रों ने इसे महज बैकअप प्लान बताया कि यदि घोषित प्रत्याशी के नामांकन में कोई समस्या हो तो दूसरा प्रत्याशी रहे।
जिले की इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपनी पत्नी को बैठाने के लिये जी जान से जुटे हैं तो वही उनके परस्पर प्रतिद्वंद्वी पूर्व सांसद हरिबंश सिंह अपनी बहू को ये कुर्सी दिलाने को आतुर हैं
जिसके लिए उन्होंने ना सिर्फ पार्टी से बगावत कर दी बल्कि अपनी ही पार्टी की सरकार के विकास कार्यों को कटघरे में खडा कर दिया।
हालांकि इतना तो तय हो गया है कि राजनैतिक दलों से अधिकृत प्रत्याशी बनने के लिये पूरी जोर लगा देने के बाद भी दोनों पूर्व सांसदों के परिवार की महिला उम्मीदवारों को निर्दल ही चुनाव लड़ना होगा।
वादों के वाद इस चुनाव में दावे तो सभी के बड़े बड़े हैं लेकिन किसका दावा अंदर से मजबूत था किसका खोखला साबित होगा ये तो समय ही बतायेगा
किन्तु भाजपा के भीतर बगावती सुर उठने की खबर पर पार्टी हाइकमान इस पर क्या कार्यवाही करेगा ये भी देखना दिलचस्प होगा।












