स्वाइन फ्लू से बचाव की जनपद में तैयारी पूरी अलर्ट
बचाव के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को लगाया टीका : सीएमओ

जौनपुर, संकल्प सवेरा । ठंड बढ़ते ही विभिन्न संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि वर्तमान में जनपद में स्वाइन फ्लू का एक भी मरीज नहीं है । स्वास्थ्य विभाग फिर भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है । यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ लक्ष्मी सिंह का ।
सीएमओ ने बताया कि स्वाइन फ्लू के टीकाकरण के लिए जनपद को टीका की 200 डोज मिली है। इसे स्वाइन फ्लू से निपटने में सहयोग करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को लगा दिया गया है। जिला पुरुष तथा जिला महिला चिकित्सालय के 20-20 स्टाफ, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) तथा शहरी क्षेत्र के तीनों प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) के पांच-पांच स्टाफ को टीका लग चुका है। संभावित मरीज मिलने पर उसे चिह्नित कर तत्काल इसकी सूचना मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय, जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) डॉ सन्तोष जायसवाल तथा जिला महामारी रोग विशेषज्ञ (ईपीडिमियोलाजिस्ट) डॉ जिया उल हक को उपलब्ध कराई जानी है। इससे जिला स्तरीय या ब्लॉक स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) मरीज गृह भ्रमण कर उसकी सैम्पलिंग कराकर जांच के लिए बीएचयू वाराणसी भेज सके।
सीएमओ ने बताया कि जिला अस्पताल के उसी मेडिकल स्टाफ को टीका लगा है जिनकी ड्यूटी स्वाइन फ्लू के वार्ड में लगाई जाएगी। जिला/ब्लाक स्तरीय आरआरटी के सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है। इससे उन्हें स्वाइन फ्लू के मरीजों के सत्यापन, लक्षण युक्त रोगियों के चिह्निकरण, सैम्पलिंग कराने तथा पुष्ट रोगियों के संपर्क में आए रोगियों को दवा उपलब्ध कराने में सहूलियत मिल सके। जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है। यह एच-1एन1 वायरस से संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से ही दूसरे तक फैलती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से वायरस हवा के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच कर उसे संक्रमित करता है। स्वाइन फ्लू संभावित रोगियों की तीन श्रेणी बनाई गई है। पहली में उन्हें रखा गया है जिन्हें हल्का बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, सिर दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत रहती है। ऐसे लोगों को घर में रहकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा खाना है तथा परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रखना है। उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती और लक्षण के आधार पर इलाज होता है।

दूसरी श्रेणी में वह मरीज आते हैं जिनमें पहली श्रेणी के सारे लक्षण होते हैं लेकिन दवा खाने के 48 घंटे बाद भी उन्हें आराम नहीं मिलता। बुखार तेज हो जाता है और गले की खराश भी बढ़ जाती है। इस श्रेणी में उन मरीजों जिनमें इन लक्षणों के साथ उच्च जोखिम (जैसे फेफड़े, लीवर, किडनी की बीमारियों से ग्रसित हों, मधुमेह या रक्तचाप की दिक्कत, अन्य न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर, कमजोर रोग प्रतिरोधी शक्ति वाले मरीज (जैसे एचआईवी/एड्स, कैंसर आदि), गर्भवती महिलाएं, 60 वर्ष से अधिक आयु वाले, छोटे बच्चे आदि शामिल हैं। ऐसे लोगों को उम्र के अनुसार दवा दी जाती है।
तीसरी श्रेणी में उन मरीजों को रखा गया है जिसमें पहली और दूसरी श्रेणी के मरीज के साथ-साथ सांस लेने में भी दिक्कत हो रही हो, सीने में दर्द, रक्तचाप का कम हो जाना, खांसी के साथ बलगम में खून का आना, नाखून का नीला पड़ जाना, नींद जैसी स्थिति का हमेशा बने रहना, बच्चों में तेज व लगातार बुखार का बने रहना, खाने का मन न करना, झटके आना, जल्दी-जल्दी सांस लेना, या सांस लेने में दिक्कत होना आदि लक्षण मिलते हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके इलाज कराना जरूरी होता है जिससे विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में मरीज की सतत निगरानी की जा सके।
जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ जिया उल हक ने बताया कि तीसरी श्रेणी के मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं होते हैं तो यह जानलेवा साबित होता है। इसलिए उपरोक्त किसी भी तरह का कोई लक्षण अपने घर, पास-पड़ोस, गांव में पाए जाते हैं तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों पर सम्पर्क करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें। लक्षणयुक्त मरीज खुद को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें। खुद को हवादार कमरे में रखे और ताजा खाना खाएं। ऐसे मरीज मिलने पर जिला अस्पताल में भर्ती कर उसका इलाज कराया जाता है।
जनपद का कोई व्यक्ति गैर जनपद के लैब या चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू प्रभावित पाया जाता है तो उसके संपर्क में रह चुके घर पर रहने वाले या अन्य जनपद में रहने वालों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों को सूचित कर रोगी का विवरण उपलब्ध कराते हुए उसे अपने लिए प्रोफाइलेक्सिस डोज स्वास्थ्य केंद्र से ले लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि जनपद में वर्ष 2016 में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज नहीं मिला, वर्ष 2017 में छह मरीज मिले, वर्ष 2018 में भी कोई मरीज नहीं मिला, 2019 में नौ मरीज मिले, 2020 में एक मरीज मिला, 2021 में कोई मरीज नहीं मिला और 2022 में अभी तक मात्र एक मरीज मिला है। जनपद स्वाइन फ्लू से पूरी तरह से सुरक्षित है।
बचाव का तरीका: खुद को अलग रखें, हवादार कमरे में रहें, ताजा खाना खाएं, डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा लें।












