…मेरी आँख की तो वह भी सरकारी नल हो गयीं थी।” बेहोश जौनपुरी
शर शय्या पर लेटे
भीष्म दे रहे थे युधिष्ठिर
को नीति और धर्म का ज्ञान तभी वहाँ पहले से ही विद्यमान,
दौपदी ने पूछा-पितामह।,
कौरवों की सभा में जब, दुःशासन कर रहा था मेरा अपमान
तब, कहाँ चली गयी थी आप की यह बुद्धि विवेक
क्यों नहीं टपका आपकी आँख से एक बूँद भी जल ?”
पितामह, दुःखी मन होकर बोले-”
पुत्री ! सच कहता हूँ उस समय,
मेरी बुद्धि न जाने कहाँ खो गयी थी रही बात मेरी आँख की तो वह भी सरकारी नल हो गयीं थी।”
बेहोश जौनपुरी














