संकल्प सवेरा मां काली पर विवादित बयान देकर घिंरी सांसद महुआ मोइत्रा से उनकी अपनी ही पार्टी ने किनारा कर लिया है। खुद ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में उन्हें इशारों में ही नसीहत दी कि गलतियां हो जाती हैं तो उन्हें सही भी किया जा सकता है। ममता बनर्जी ने भले ही उनका नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को महुआ मोइत्रा को माफी मांगने की नसीहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि महुआ मोइत्रा लगातार दोहरा रही हैं कि मैं अपने बयान पर कायम हूं। यही नहीं उन्होंने तो यहां तक कहा कि जितनी एफआईआर दर्ज करानी हैं करा लो, मैं कोर्ट में ही बात करूंगी।

एक तरफ पार्टी लगातार उनके बयान को निजी बताकर पल्ला झाड़ रही है तो वहीं महुआ मोइत्रा ने टीएमसी के ट्विटर हैंडल को अनफॉलो कर असहमति का संकेत दे दिया। लेकिन अब तक दोनों पक्षों ने कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया है। ऐसे में यह सवाल भी उठते हैं कि ममता बनर्जी से उनके कैसे रिश्ते रहे हैं और क्या महुआ मोइत्रा टीएमसी छोड़ भी सकती हैं? दरअसल यह पहला मौका नहीं है, जब महुआ मोइत्रा की राय पार्टी से अलग रही है। इससे पहले बीते साल उन्होंने गौतम अडानी पर हमला बोलते हुए कई ट्वीट किए थे। फिर जब ममता बनर्जी ने उनसे दिसंबर में मुलाकात की तो लोगों ने पूछा कि क्या अब भी वह अपने बयान पर कायम हैं
इस पर महुआ मोइत्रा ने कहा था कि मैं अब भी अपनी बात पर कायम हूं। तब भी पार्टी असहज हुई थी, लेकिन उसकी ओर से महुआ के बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई और मामला कुछ दिन में निपट गया था। हालांकि पार्टी में गुटबाजी के आरोपों पर बीते साल दिसंबर में ही ममता बनर्जी ने उनकी क्लास लगाई थी। ममता बनर्जी ने नदिया जिले में हुई एक मीटिंग के दौरान कहा था, ‘महुआ, मैं एक स्पष्ट संदेश देना चाहती हूं। मैं यह नहीं देखना चाहती कि कौन किसके पक्ष में है और कौन किसके खिलाफ है। यदि कोई किसी को पसंद नहीं करता है और उसे लेकर यूट्यूब और न्यूजपेपर में कुछ बोलता है तो ऐसी राजनीति एक-दो दिन ही चल सकती है। हमेशा ऐसा नहीं होगा
2010 में कांग्रेस छोड़ टीएमसी आई थीं महुआ मोइत्रा
इसके आगे ममता बनर्जी ने कहा था, ‘एक पद पर एक व्यक्ति हमेशा के लिए बना रहेगा, ऐसा मान लेना भी सही नहीं है। जब चुनाव होगा, तो पार्टी तय करेगी कि कौन लड़ेगा और कौन नहीं। इसलिए, यहां कोई असहमति नहीं होनी चाहिए।’ उनकी इस टिप्पणी को निकाय चुनाव में टिकट बंटवारे से भी जोड़ कर देखा गया था। महुआ मोइत्रा का यह सांसद के तौर पर पहला कार्यकाल है और इससे पहले विधायक भी रह चुकी हैं। 2010 में कांग्रेस से टीएमसी में आने के बाद ही उनकी सिय़ासी पारी तेजी से आगे बढ़ी और 2016 में विधायक और फिर 2019 में कृष्णानगर सीट से सांसद चुनी गईं
ऐसे में फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि टीएमसी से मतभेदों के बाद भी महुआ मोइत्रा पार्टी छोड़ेंगी। इसकी वजह यह है कि जिस कांग्रेस को छोड़कर वह टीएमसी में आई थीं, वह अब बेहद कमजोर है। इसके अलावा वामपंथी दलों की हालत भी पतली है। मुख्य विपक्षी दल के तौर पर भाजपा ही है। लेकिन उसमें वह जा नहीं सकतीं, इसकी वजह यह है कि उसी के मुकाबले वह खुद इस विवाद में खड़ी हैं। ऐसे में भले ही टीएमसी में उनकी भूमिका आने वाले वक्त में कमजोर कर दी जाए, लेकिन ममता और महुआ का साथ अभी बना रहने वाला है












