संतुलित और पौष्टिक आहार गर्भवती को आवश्यक
गर्भावस्था के दौरान रूटीन चेकअप भी अनिवार्य, आहार में भिन्नता व आयरन गोलियों के उपयोग से होता है शारीरिक, मानसिक विकास
एसीएमओ आरसीएच ने गर्भावस्था के दौरान 10 से 12 किलो वजन बढ़ाने की दी सलाह
जौनपुर,संकल्प सवेरा गर्भवती ही अपने पेट में पल रहे शिशु को पोषण देती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान उसे अधिक पोषण की जरूरत होती है। इस दौरान मां को पोषक आहार न मिला तो शिशु कुपोषित हो सकता है। सही भोजन, नियमित वजन की निगरानी तथा समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच महिला और शिशु का विकास सुनिश्चित कर सकते हैं। यह कहना है अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) तथा रीप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) के नोडल अधिकारी डॉ सत्य नारायण हरिश्चंद्र का।

डॉ सत्य ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला का वजन लगभग 10-12 किलो बढ़ जाता है। गर्भवस्था के दौरान हर गर्भवती को कम से कम 5 बार (तीन बार मुख्य भोजन और दो बार नाश्ता) संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। हर बार के आहार में भिन्नता होनी चाहिए। इसके लिए निम्न खाद्य समूहों में से रोज कम से कम पांच खाद्य समूहों को अपने आहार में शामिल करें। चौरंगा (हरा, लाल, पीला और सफेद) आहार लेना चाहिए। हरे में हरी पत्तेदार सब्जी शामिल है। लालरंग के लिए मांसाहारी मांस, मछली जबकि शाकाहारी राजमा, सोयाबीन, गहरे लालरंग के फल ले सकते हैं। पीले रंग में दालें तथा सब्जियां, संतरा, नारंगी आदि हैं। सफेद में दूध, दही, अंडा, पनीर तथा दूध से बनी वस्तुएं शामिल हैं।

लाल आयरन की गोलियों का सेवन जरूरी:
गर्भावस्था के दौरान आयरन की जरूरत बढ़ जाती है जिससे महिला को थकान, चक्कर, समय से पहले प्रसव और जटिल प्रसव की संभावना बढ़ जाती है I साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा पहुंच सकती है।
आयरन की कमी पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ रोजाना आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है। हीमोग्लोबिन की जांच के आधार पर नजदीकी आशा कार्यकर्ता या एएनएम से सम्पर्क कर इसका उपयोग करना चाहिए। दूसरी और तीसरी तिमाही में प्रतिदिन एक आयरन (आईएफए) टैबलेट का सेवन करना चाहिए और बच्चे के जन्म के छह महीने बाद तक इसे जारी रखें। सभी गर्भवती यहां तक कि जिन्हें एनीमिया नहीं है उन्हें भी रोजाना लाल आयरन टैबलेट का सेवन करना चाहिए।

लाल आयरन की गोलियां न केवल एनीमिया को कम करती हैं बल्कि भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए भी फायदेमंद होती हैं। कुछ महिलाओं को आयरन की गोली खाने के बाद मितली, चक्कर आदि दिक्कतें होती हैं, इससे बचने के लिए आयरन की गोली को भोजन के एक घंटे बाद या आधा खाने के बाद ही सेवन कर लेना चाहिए। गोलियां लेना बंद न करें| ध्यान रहे आयरन और कैल्शियम की गोली को कभी साथ नहीं लेना चाहिए।
गर्भवती को दिन में दो से चार घंटे आराम अवश्य करना चाहिए। गर्भवती को सामान्य दिनों की अपेक्षा डेढ़ गुना ज्यादा भोजन करना चाहिए। पूरे गर्भावस्था के दौरान चार बार प्रसव पूर्व जांचें अवश्य करानी चाहिए जिसमें से दो जांचें चिकित्साधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। प्रसव पूर्व जांचों में हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, वजन, शुगर, एलब्यूमिन व ब्लड ग्रुप की जांचें प्रत्येक चिकित्सा इकाई भ्रमण के दौरान कराई जानी चाहिए। एक बार एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस की भी जांच जरूरी है जिससे कि शिशु को भविष्य में होने वाले संक्रमण से बचाया जा सके।
प्रसव प्रबंधन की भी योजना जरूरी है। इसके लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र का पता, 102 और 108 एम्बुलेंस और क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता का नम्बर जरूरी है।












