एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कोरोना मरीजों के इलाज, होम आइसोलेशन समेत कई मसलों पर विस्तार से बताया
अगर पैरासेटमॉल 650 दिन में 4 बार लेने के बावजूद भी न उतरे तो डॉक्टर से करें संपर्क- गुलेरिया
जिन मरीजों को बुखार या खांसी 5 दिनों से ज्यादा वक्त से है और ठीक नहीं हो रही, वे इनहेलर ले सकते हैं- गुलेरिया
नई दिल्ली ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कोरोना के लक्षणों, इलाज, होम आइसोलेशन समेत कई अहम पहलूओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने विस्तार से समझाया कि होम आइसोलेशन में क्या करें, क्या न करें, रेमडेसिविर या आइवरमेक्टिन कब लें, इनहेलर से फायदा है या नहीं, ऑक्सिजन की कब जरूरत होगी। एम्स डायरेक्टर ने यह भी बताया कि वॉर्निंग साइन क्या हैं यानी ऐसे कौन से संकेत है जिन्हें मरीज में देखने के बाद तत्काल संभलने और अस्पताल का रुख करने की जरूरत होती है।
यहां यह बात ध्यान देने की जरूरत है कि खुद ही डॉक्टर न बनें और सुझाई गई दवाओं का वैसे ही सेवन न करें। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श बहुत जरूरी है, भले ही वह फोन पर ली गई हो या फिर ऑनलाइन कंसल्टेशन हो।
बुखार, खांसी, जुकाम…कौन सी दवा लें?
जो हम आम लक्षण देखते हैं कोविड में वो हैं- बुखार, जुकाम, नजला, गले में खराश, खांसी है। ऐसे में बुखार के लिए पैरासेटमॉल, जुकाम के लिए एंटी एलर्जिक ले लें कोई, खांसी के लिए कोई भी कफ सिरफ ले लें। साथ में नमक के गरारे और भांप ले सकते हैं दिन में दो दफा। इससे कई मरीजों को आराम मिलता है।
अगर बुखार न उतर रहा हो तो क्या करें?
कई मरीज ऐसे हैं जो कह रहे हैं कि पैरासेटमॉल से उनका बुखार नीचे नहीं आ रहा। 101-102 डिग्री बुखार रह रहा है। अगर आपका बुखार पैरासेटमॉल-650 से कम नहीं हो रहा है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। वह कोई नेप्रोक्सॉन जैसी कोई दवा दे सकते हैं जो लंबे वक्त तक लगातार बुखार के केस में दी जाती हैं।
आइवरमेक्टिन के बारे में क्या बोले डॉक्टर गुलेरिया
आइवरमेक्टिन दवा को रोज ले सकते हैं 3 से 5 दिनों के लिए खाली पेट।
जिन मरीजों को बुखार या खांसी 5 दिनों से ज्यादा वक्त से है और ठीक नहीं हो रही, वे इनहेलर ले सकते हैं जिससे आराम मिलता है। बुडेसोनाइड की 800 माइक्रोग्राम दिन में 2 बार 5 से 7 दिन या 10 दिनों तक इनहेलर के जरिए ले सकते हैं। ये दवा फेंफड़े में जाकर आराम देते हैं।
रेमडेसिविर की जरूरत है या नहीं, जानें
रेमडेसिविर को घर पर बिल्कुल न लें। इस दवा के अपने साइडइफेक्ट्स हैं और सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए यह दवा एडवाइज की जा रही है। पहले भी कहा है, आज भी कहना चाहूंगा कि रेमडेसिविर होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों यानी माइल्ड इन्फेक्शन या एसिम्प्टोमैटिक (बिना लक्षण वाले) मरीजों के लिए बिल्कुल फायदेमंद नहीं है बल्कि इसके नुकसान ही हैं। इसलिए घर पर रेमडेसिविर बिल्कुल न लें।
कैसे जानें कि मेडिकल ऑक्सिजन की जरूरत है?
अगर आपको लगे कि आपका ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल कम हो रहा है, 90 के पास आ रहा है या आपको सांस में दिक्कत आ रही है, आप खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। यह बहुत जरूरी है ताकि आपको समय पर इलाज मिल सकेगा और अगर भर्ती करने की जरूरत हुई तो समय से भर्ती हो सकेंगे।
कब खत्म करना चाहिए होम आइसोलेशन
आखिर कब होम आइसोलेशन खत्म किया जाना चाहिए? पहली बार सिम्पटम आने के 10 दिन बाद होम आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। एसिम्प्टोमैटिक केस में जिस दिन टेस्ट के लिए सैंपलिंग हुई, उसके 10 दिन बाद होम आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। या फिर लगातार 3 दिनों तक बुखार न हो तब भी होम आइसोलेशन खत्म किया जा सकता है। अगर आपको छठे या सांतवें दिन के बाद से बुखार नहीं हुआ हो और आप 10 दिन पूरे कर लेते हो तब होम आइसोलेशन की जरूरत नहीं है।












