जौनपुर। चुनाव!!वर्तमान में इसे कलयुग का महाभारत कहा जाए तो अतिश्योक्ति नही होगी,जहां एक साथ एक ही पार्टी में रहने वाले चुनावी शंखनाद होते ही अलग अलग खेमों में खड़े होकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के तीर अपनी जिह्वा रूपी धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ाकर छोड़ना शुरू कर देते हैं, तो वहीं कभी दुश्मन रह चुके प्रतिद्वंदी भी चुनावी महाभारत को जीतने के लिए एक दूसरे की गलबहियां करते दिख जाते हैं।
ऐसे में जनपद की मल्हनी विधानसभा में उपचुनाव रूपी महाभारत को अब एक सप्ताह का ही समय शेष रह गया है।टिकट वितरण व पर्चा दाखिल के बाद अब यह स्पष्ट हो चला है कि मल्हनी के कुरुक्षेत्र में कौन किस खेमे में खड़ा है।हालांकि यहाँ भी कई दावों और कयासों के बावजूद तमाम अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिल गया जहां अंतिम समय मे देश की दो मुख्य राजनैतिक पार्टियों भाजपा व कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर ही दी।
जबकि इसके पूर्व प्रदेश की दो मुख्य पार्टी सपा व बसपा ने अपने रणबांकुरों के नामों की घोषणा करके युद्ध मैदान में पहले भेज दिया था जिससे वे क्षेत्र के लोगों का मिजाज समझकर उन्हें अपने साथ मिला सकें।उक्त चार पार्टियों के प्रत्याशी के अतिरिक्त एक खेमा अन्ततः निर्दल प्रत्याशी बने धनंजय सिंह का है।यहां अंततः शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है इसका विश्लेषण आवश्यक है।ज्ञातव्य है कि धनंजय सिंह जहाँ पूर्व में बसपा के सांसद व कद्दावर नेता रह चुके हैं तो वहीं वे मल्हनी विधानसभा के उदय के बाद से इस विधानसभा के विधायक रूपी अविजित राजा रहे पारसनाथ यादव के चरम प्रतिद्वंद्वी भी रहे हैं।
जबकि बीते चुनाव में धनंजय उस निषाद पार्टी के प्रत्याशी थे जो भाजपा की सहयोगी पार्टी है,पूर्व में इस बात की पूरी संभावना रही कि भाजपा यह सीट छोड़ देगी तथा वे निषाद पार्टी से चुनाव लड़ेंगे लेकिन समयचक्र बदला और भाजपा ने चुनाव लड़ने की घोषणा की,फिर कुछ समय तक उनके कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की सम्भवतः अफवाह उड़ी।और सपा से पारसनाथ यादव के उत्तराधिकारी के रूप में लकी यादव का नाम मल्हनी का किला बचाने के लिया सामने आने व बसपा से जे पी दुबे,भाजपा से मनोज सिंह तथा काँग्रेस से मंगला मिश्र को टिकतरूपी सेनापति के कमान की जिम्मेदारी मिलने के बाद अंततः धनंजय निर्दल ही कुरुक्षेत्र के रण में उतर गए हैं।माफ कीजियेगा अन्य निर्दल प्रत्याशियों की चुनावी रण की पृष्ठभूमि ना होने के चलते उनका जिक्र यहाँ नही किया जा रहा है।
मल्हनी के कुरुक्षेत्र में सभी सेनापति अपनी सेनाओं के साथ पहुंच चुके हैं।जबकि सभी खेमो के साथ उनके स्टार प्रचारकों रूपी सहयोगी भी समय समय पर इस रण में उनके पास पहुंचकर युद्ध जिताने की पूरी कोशिश करने में लगे हैं।बीजेपी के स्टार प्रचारक रूपी सहयोगियों की सूची में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या,दिनेश शर्मा, मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या, सुनील बंसल,सूर्य प्रताप शाही,संतोष गंगवार,संजीव बलयान,साध्वी निरंजन ज्योति ,श्री कांत शर्मा,ब्रजेश पाठक,महेन्द्र सिंह,चैधरी भूपेन्द्र सिंह,रामपति शास्त्री,अनील राजभर,कपिल देव अग्रवाल,सतीश द्विवेदी,नीलीमा कटियार,विजय कश्यप , एसपी सिंह बघेल,सतपाल सैनी,बीएल वर्मा, वाई पी सिंह,प्रांशूदत्त द्विवेदी,शकंर लोधी, त्रयबंक त्रिपाठी , संजय राय और दिनेश लाल निरहूआ व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत अन्य विधानसभा के विधायक राज्यसभा सांसद व लगभग एक दर्जन मंत्री मैदान में है।
वही बसपा के स्टार प्रचारक रूपी सहयोगियों के सूची में पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती,सतीश चंद्र मिश्र,आकाश आनंद,जौनपुर सांसद श्याम सिंह यादव,विधायक सुषमा पटेल,पूर्व नगरपालिका चेयरमैन दिनेश टंडन समेत 30 दिग्गज लोग शामिल हैं।
तो वहीं कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक रूपी सहयोगियों की सूची में प्रियंका गांधी,जितीन प्रसाद पूर्व केन्दीय मंत्री,प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू,प्रमोद तिवारी पूर्व राज्यसभा सांसद ,नदीम जावेद पूर्व विधायक,आर के चौधरी प्रदेश उपाध्यक्ष,आराधना मिश्रा मोना,अजय राय पूर्व विधायक देवब्रत मिश्रा ,मनोज यादव जैसे योद्धा शामिल हैं।
जबकि समाजवादी पार्टी द्वारा घोषित– मल्हनी के स्टार प्रचारक रूपी सहयोगी की सूची में ललई यादव पूर्व मंत्री, जगदीश सोनकर पूर्व मंत्री, राजनरायन बिन्द पूर्व जिलाध्यक्ष, श्यामलाल पाल प्रदेश सचिव, इन्द्रजीत सरोज जैसे दिग्गज सम्मिलित हैं।इन चारों पार्टियों के बाद सबसे ज्यादा निगाहें निर्दल प्रत्याशी धनंजय सिंह पर हैं।हालांकि निर्दल प्रत्याशी होने के नाते अपने खेमे की पूरी बागडोर धनंजय ने खुद ही सम्हाल रखी है तो वहीं आश्चर्यजनक रूप से बसपा के विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू उनके परम सहयोगी के रूप में उनके चुनावी रथ के सारथी जरूर बनकर चुनावी रण में स्टार प्रचारक की भूमिका भी निभा रहे हैं।
चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदान की तारीखों पर गौर करें तीन नवम्बर को मल्हनी में चुनावी महासंग्राम होगा,एक सप्ताह में इस महासंग्राम को जीतने के लिए सभी पार्टियों के खेमे अपने स्टार प्रचारक रूपी रणयोद्धाओं के साथ चक्रव्यूह की रचना में जुट गए हैं, कोई धन के प्रलोभन का चक्रव्यूह रच रहा,तो कोई अपने प्रतिद्वंदी को नियमों में उलझाने का चक्रव्यूह बना रहा,तो कोई अपने बल पराक्रम से अपने प्रतिद्वंद्वी को डरा धमका कर रण छोड़ने को मजबूर करना चाहता है तो कोई अपने सहयोगियों के साथ मतदाताओं हर सम्भव उज्ज्वल भविष्य का दिवास्वप्न दिखाने में लगा है।
इस चुनावी महाभारत का विजेता कौन होगा ये कालचक्र बताएगा फिलवक्त स्टार प्रचारक रूपी योद्धाओं की फौज है इस युद्ध के अभिमन्यु के लिये चक्रव्यूह की रचना में लगे हैं।देखना दिलचस्प होगा कि इस चक्रव्यूह का भेदन कौन सा अर्जुन करेगा ।












