भारतीय सभ्यता की धरोहर के रूप में संस्कृत का वाड्मय भरा पड़ा है। भारतीय नैतिक मूल्यों की संवाहिका भाषा संस्कृत है उक्त बातें श्री गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय सुजानगंज जौनपुर द्वारा संस्कृत दिवस के उपलक्ष में फेसबुक पेज पर सप्तदिवसीय संस्कृत व्याख्यानमाला के छठे दिन दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर के सहायक आचार्य डॉ0 सूर्यकांत त्रिपाठी ने कही। सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राध्यापक विनोद कुमार त्रिपाठी ने मंगलाचरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात डॉ0 सूर्यकांत त्रिपाठी जी ने अपने व्याख्यान संस्कृति हिताय प्रवर्तताम् संस्कृतम् विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज हमें अपने नैतिक मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता है। समाज में नैतिकता का पतन होता जा रहा है । इसका सबसे बड़ा कारण है कि आज हम पाश्चात्य सभ्यता के पोषक होते जा रहे हैं। हमें अपनी भारतीय सभ्यता के संरक्षण एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन हेतु अपना उत्तरदायित्व स्वीकार करना होगा। इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ0 जयप्रकाश तिवारी जी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।अन्त में महाविद्यालय के प्राचार्य विनय कुमार त्रिपाठी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।












