ज्ञान परस्पर देवी मातृ सरस्वती तुम आदि देवी
मातृ चरण स्पर्श से करते है वन्दन-नमन देवी
आपकी कृपा से प्राप्त है आधार
सकुशल है आपकी कृपा का विस्तार,
कर्त्तव्य से संयोजित रहे
स्वयंसेवक बन कर रहे
आपके अवतार का ना कर सकते है बखान
स्वरदेवी सदैव बनी रहे आपकी पथ का अभियान,
निरन्तर होता रहे आपकी दृष्टि से लोकहित का कल्याण
स्वर कि कुशलता को निखारे देवी सभी को दें उच्च परिमाण।
रचित-
युवा लेखिका-आँचल सिंह
जौनपुर(उत्तरप्रदेश)।












