परहित से दूरी रखते हो,ईर्ष्या नफ़रत से छलते हो,आखिर ऐसा क्यों करते हो?:प्रो.आर.एन.सिंह
कोशिश की मासिक काव्य-गोष्ठी संपन्न
संकल्प सवेरा जौनपुर कोशिश की मासिक काव्य-गोष्ठी रास मंडल जौनपुर में प्रख्यात कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। वाणी वंदना के पश्चात रामजीत मिश्र ने गीत,और गजल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।उनका शेर—दूसरों को नसीहत में माहिर सभी/बुद्ध ही बुद्ध हैं जिस तरफ देखिए।
सामाजिक समरसता की कलई खोल गया।सागर ने जब कहा—तुम्हारे प्यार से जब भी पुरानी बात होती है/करवटों में सारी रात तमाम होती है।प्रो.आर.एन.सिंह ने अपने गीत के माध्यम से एक प्रश्न उछाला—परहित से दूरी रखते हो/ईर्ष्या, नफ़रत से छलते हो/आखिर ऐसा क्यों करते हो?
कविता की जनपक्षधरता की ओर संकेत किया।
प्रो.पी.सी.विश्वकर्मा का शेर–बेवफा लोगों में पैगामे वफा ले आते/गंदे माहौल में क्यों साफ वफा ले आये। विसंगतियों पर मारक प्रहार कर गया। जनार्दन अष्ठाना का गीत—मन कब तक याद करे उन बीती बातों को।
वियोग का बड़ा मार्मिक चित्रण लगा। गिरीश कुमार गिरीश का शेर—सिमट कर सूखती ही जा रही आंखों में पानी है/नदी रेतों भरी है और वो कहता रवानी है।
व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया।
अशोक मिश्र का दोहा–उस देहरी पर दीप धर,जो प्रकाश से दूर।
अधरों पर आए हंसी, खुशियां दो भरपूर।
उत्सव के मर्म को व्यंजित कर गया।
गोष्ठी में फूलचंद भारती, सीमा सिंह, सुमति श्रीवास्तव, राजेश पाण्डेय, आशुतोष पाल और सुशील दूबे ने काव्यपाठ कर गोष्ठी में विविध रंग घोल दिया। संचालन अशोक मिश्र ने और आभार डाक्टर विमला सिंह ने किया।
अशोक मिश्र
कोशिश परिवार, जौनपुर।











