संकल्प सवेरा
गजल
क्यों छोड़ गए तन्हाई में
हम रोए बहुत जुदाई में
आंसू रुकते नहीं अब ये
आंखे रोई है बिदाई में
अब न वो मौसम व बहार
और नहीं रास ऋतु आई में
हम जा न सके साथ तेरे
तुम आ न सके अंगनाई में
तुमने तो दी थी एक पुकार
हम भूल गए रुसवाई में
घर की रौनक सब साथ तेरे
हम तड़फ रहे है खुदाई में
तन टूट गया सब सुकून गया
“शिशिर “कह न सकी जग हंसाई में
पूजा मिश्रा –












