पीयू में सोशल डिस्टेसिंग के साथ मना स्वतंत्रता दिवस
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 74वां स्वतंत्रता दिवस शनिवार को सोशल डिस्टेसिंग के अनुपालन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के नाम कुलपति प्रो. टीएन सिंह का उद्बोधन भी पढ़ा।
कुलपति ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि कोरोना काल में हमें सृजनात्मक बनना होगा तभी हम चुनौतियों से लड़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि आपदा को अवसर में बदलने की चुनौती के लिए विश्वविद्यालय परिवार के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। विश्वविद्यालय के 909 महाविद्यालय, आठ चिकित्सीय प्रशिक्षण संस्थान और परिसर स्थित इंजीनियरिंग, रज्जू भैया संस्थान, विज्ञान संकाय समेत सभी संस्थानों से सम्बद्ध समस्त संस्था प्रमुखों, विद्यार्थियों और कर्मचारी बधाई के पात्र है जो संकट की घड़ी में अपनी सेवा से विश्वविद्यालय को नई गति प्रदान कर रहे हैं। इस विश्वविद्यालय की गौरवशाली यात्रा के आप भागीदार हैं और आज के शुभ दिन के साझीदार भी हैं| उन्होंने कहा कि मनुष्यता के इतिहास में अनेक निर्णायक दौर आते हैं| कोविड-19 भी एक निर्णायक समय है| पूरी मानवता के सामने कोरोना सबसे बड़े अवरोधक के रूप में आया है, पर मनुष्य की जिजीविषा के आगे कोरोना को हारना पडेगा| और मानव इतिहास की जय यात्रा अपने मुकाम की ओर अग्रसर होगी|

कहते हैं, ज़िंदा सभ्यताएँ और संस्कृतियाँ अपने आस–पास घटित अघटित गतिविधियों पर पैनी नज़र रखती है| कोरोना ने सभ्यता,संस्कृति के मानकों को पूरी तरह बदल देने के अभियानों को मूर्त रूप दे दिया है, सबकुछ तेज़ी से बदल रहा है, ऐसे में हमारे सामने– दो विकल्प हैं– या तो हम बदलाव के प्रति चौकन्ने नज़रिए को अपनाते हुए भारतीय सभ्यता संस्कृति के साथ तालमेल बैठाते हुए नीति-निर्माण हेतु अध्ययन–विश्लेषण की दिशा में सक्रिय हों या फिर शुतुरमुर्ग की तरह बदलाव की आंधी के वक्त रेत में सिर गड़ाकर जमींदोज हो जाएँ। जाहिर है पहला रास्ता जीवन सृजन का रास्ता है| हम यह भलीभांति जानते हैं कि पारम्परिक अध्ययन पद्धति के समानांतर अब ई–अधिगम जिसे शिक्षा के नए साधनों के प्रति भी हमारी ज़िम्मेदारी के साथ- साथ संक्रमण काल में शिक्षा संस्थानों की सक्रियता में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है| उन्होंने आह्वान किया की शिक्षाकर्मी इस दिशा में संवेदनशील ढंग से विचार करें|
उन्होंने कहा कि 73 सालों में भारत ने विश्व समुदाय के बीच एक आत्मनिर्भर, सक्षम और स्वाभिमानी देश के रूप में अपनी जगह बनाई है। सभी समस्याओं के बावजूद अपने लोकतंत्र के कारण वह तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बना रहा है। इस अवसर पर वित्त अधिकारी एमके सिंह, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफ अजय द्विवेदी, कुलानुशासक डॉ संतोष कुमार. परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह, सहायक कुलसचिव अमृतलाल, डॉ के एस तोमर, प्रो. अविनाश पार्थीडेकर, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. देवराज सिंह, डा. राज कुमार, डा. मनीष कुमार गुप्ता, डा. सुनील कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. नीतेश जायसवाल आदि शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित थे।












