भक्ति साधना में बाधक है, तमशी आहार
भुआ कला में बही कथामृत रसधारा
संकल्प सवेरा सिकरारा : क्षेत्र के भुआकला स्थित श्री जटा धारी महादेव धाम पर चल रही श्रीराम कथा में गुरुवार की संध्या को श्री योगी बाबा परमहंस ने कथा प्रेमियों को बताया कि भक्ति साधना में तामसी आहार करना हानिकारक होता है। कहा गया है जैसा खाए अन्न वैसा होवे मन।
उन्होंने कहा कि मनुष्यो को खट्टा मीठा चटपटा बासी भोजन नही करना चाहिए ।हमेशा साधा सात्विक भोजन करना चाहिए ताकि भजन में बाधा न आए ।राजसी भोजन से वृत्ति चंचल रहती है ।चंचलता से भजन नहीं होता है ।हमेशा सात्विकता से ही रहना है । प्रभु से याचना करो कि नाथ अब मेरे जीवन में आपकी कृपा से सारे दुर्गुण नष्ट हो जाय।
आपके सिवाय मेरा कोई भी सहारा नही है ।आप ही शक्ति दीजिये ।तब गुरुदेव जी अपनी तरह चलने का साधन बतायेंगे क्योंकि गुरुओ के पास हर तरह की युक्तियाँ होती है ।वे तुम्हें सरल से सरल युक्तियों को बताकर तुम्हारा रास्ता सीधा कर देगे।गुरु देव प्रसन्न हो जाय तो जो बाते आपके जीवन में आजतक नहीं हुई सो अब होने वाली है ।सो यह आप पर गुरु की ही कृपा है ।जो भी आपके अंदर कमजोरियाँ है सो गुरुजी के सामने उठाकर रख दो और उनसे कह दो कि मेरे अंदर यह रोग है ।आप इसका इलाज करो मैं तो कुछ नही जानता हूँ ।आप ही इस काम को करने में समर्थ है ।
मै तो निर्बल हूँ ।कथा के प्रारम्भ में मुख्य यजमान राज नाथ चौबे द्वारा ब्यास तथा श्री रामचरित मानस ग्रन्थ की पूजा अर्चना कर आरती की गई।इस मौके पर लक्ष्मी नारायण पॉण्डेय अंशुमन चतुर्वेदी अमन चतुर्वेदी रोहित सिंह आनन्द कुमार शिवा सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा प्रेमी उपस्थित रहे।












