निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी
-महात्मा गांधी

संकल्प सवेरा, जौनपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के इन्हीं विचारों के कारण आज उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में दुनिया भर में मनाया जाता है!
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर जौनपुर कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने पूरे जोशी खारो उसके साथ उनका जन्मदिन मनाया! कांग्रेसी कचहरी स्थित गांधी तिराहे पर पहुंचे और गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके महात्मा गांधी जी को याद किया साथ ही साथ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर भी माल्यार्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई!
माल्यार्पण के उपरांत संगोष्ठी पर बोलते हुए शहर अध्यक्ष विशाल सिंह हुकुम ने कहा कि निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।
-महात्मा गांधी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के इन्हीं विचारों के कारण आज उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में दुनिया भर में मनाया जाता है!
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर जौनपुर कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने पूरे जोशी खारो उसके साथ उनका जन्मदिन मनाया! कांग्रेसी कचहरी स्थित गांधी तिराहे पर पहुंचे और गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके महात्मा गांधी जी को याद किया साथ ही साथ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर भी माल्यार्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई!
माल्यार्पण के उपरांत संगोष्ठी पर बोलते हुए शहर अध्यक्ष विशाल सिंह हुकुम ने कहा कि 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व संभालते हुए , गांधी ने गरीबी को कम करने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार करने, धार्मिक और जातीय सौहार्द का निर्माण करने, अस्पृश्यता को समाप्त करने और सबसे ऊपर, स्वराज या स्व-शासन प्राप्त करने के लिए देशव्यापी अभियानों का नेतृत्व किया। गांधीजी ने भारत के ग्रामीण गरीबों की पहचान के रूप में हाथ से काते गए सूत से बुनी छोटी धोती को अपनाया। उन्होंने
आत्मनिरीक्षण और राजनीतिक विरोध दोनों के साधन के रूप में एक आत्मनिर्भर आवासीय समुदाय में रहना , सादा भोजन करना और लंबे उपवास करना शुरू कर दिया। आम भारतीयों में उपनिवेशवाद-विरोधी राष्ट्रवाद लाते हुए, गांधीजी ने ब्रिटिश द्वारा लगाए गए नमक कर को चुनौती देने में उनका नेतृत्व किया 400 किमी दांडी नमक मार्च और 1942 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने के आह्वान के साथ उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी । इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष डॉ राकेश उपाध्याय ने कहा कि आजादी के बाद जब कांग्रेस सत्ता में आई, उससे पहले ही राष्ट्रीय संग्राम के नेता विनीत एवं नम्र लाल बहादुर शास्त्री के महत्व को समझ चुके थे। 1946 में जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो इस ‘छोटे से डायनमो’ को देश के शासन में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए कहा गया। उन्हें अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया और जल्द ही वे गृह मंत्री के पद पर भी आसीन हुए। कड़ी मेहनत करने की उनकी क्षमता एवं उनकी दक्षता उत्तर प्रदेश में एक लोकोक्ति बन गई। वे 1951 में नई दिल्ली आ गए एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई विभागों का प्रभार संभाला – रेल मंत्री; परिवहन एवं संचार मंत्री; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री; गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे।तीस से अधिक वर्षों तक अपनी समर्पित सेवा के दौरान लाल बहादुर शास्त्री अपनी उदात्त निष्ठा एवं क्षमता के लिए लोगों के बीच प्रसिद्ध हो गए। विनम्र, दृढ, सहिष्णु एवं जबर्दस्त आंतरिक शक्ति वाले शास्त्री जी लोगों के बीच ऐसे व्यक्ति बनकर उभरे जिन्होंने लोगों की भावनाओं को समझा। वे दूरदर्शी थे जो देश को प्रगति के मार्ग पर लेकर आये। लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी के राजनीतिक शिक्षाओं से अत्यंत प्रभावित थे। अपने गुरु महात्मा गाँधी के ही लहजे में एक बार उन्होंने कहा था – “मेहनत प्रार्थना करने के समान है।” महात्मा गांधी के समान विचार रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ पहचान हैं।
इस मौके पर जिलाउपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बाबा, मांगला गुरु, अनिल सोनकर, अनिल दुबे, गौरव सिंह सनी, अजय सोनकर, नेसार इलाही, सन्दीप सोनकर, राजकुमार निषाद, अमित मिश्रा, राजकुमार गुप्ता, आदिल, गौरव मौर्या, सन्दीप निषाद, ताहिर, अली सब्बल, इक़बाल आदि लोग मौजूद रहे.












