अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के बाद से दान देने का सिलसिला तेज हो गया है. उधर अपराधियों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अकाउंट में ही सेंध लगा दी है.
कोरोना काल में बढ़े साइबर अपराध और ठगी की चपेट में अयोध्या के रामलला भी आ गए. बदमाशों ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या’ के अकाउंट में सेंध लगा दी है. राम मंदिर निर्माण के लिए जहां देशभर के रामभक्तों द्वारा दिल खोलकर दान दिया जा रहा है. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन के बाद से दान देने का भी सिलसिला तेज हो गया है. बड़ी संख्या में भक्त राम मंदिर के लिए दान दे रहे हैं. राम मंदिर के खाते में अब तक करीब 70 करोड़ रुपये का दान मिल चुका है. रामलला के नाम पहले ही करीब 11 करोड़ की धनराशि जमा थी, अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठित होने के बाद भारी धनराशि दान में आ रही है.
अयोध्या के रामकोट इलाके में राम जन्मभूमि ट्रस्ट कार्यालय में प्रतिदिन दान के रूप में करीब पचास हजार रुपये आ रहे हैं. बड़ी संख्या में चेक भी कार्यालय पहुंच रहे हैं, जिसे बैंक में जमा कराया जा रहा है. वहीं ऑनलाइन दान सहित डाकखाने में मनीआर्डर भी आ रहे हैं. उधर, दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते से जालसाजी कर धन निकालने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या का भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या के नया घाट शाखा में अकाउंट खुला हुआ है. उसमें ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र सिग्नेचर अथॉरिटी हैं. ट्रस्ट का कोई भी भुगतान सिर्फ इन्हीं दोनों के दस्तखत से हो सकता है. 7 सितंबर की दोपहर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, लखनऊ से महामंत्री चंपत राय के पास फोन आया कि चेक संख्या 740798 के माध्यम से 9 लाख 86 हजार का भुगतान का चेक बैंक में जमा किया गया है. बैंक कर्मी ने पूछा कि क्या यह भुगतान किया जाना है? जब महामंत्री चंपत राय ने चेक बुक देखी तो पता चला कि इस नंबर का को चेक काटा ही नहीं गया है. जब पहले ट्रांसफर हुए पैसों की चेक संख्या मिलाई गई तो वे भी चेकबुक में लगे मिले. चंपत राय ने फौरन इसकी जानकारी ट्रस्ट के अन्य सदस्यों और अयोध्या के पुलिस अधिकारियों को दी. ट्रस्ट के अकांउट के साथ फर्जीवाड़े का पता चलते ही हड़कंप मच गया. आनन-फानन में महामंत्री चंपत राय ने अयोध्या कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. बैंक द्वारा भी त्वरित कार्रवाई करते हुए जालसाज द्वारा लगाए गए 9 लाख 86 हजार के फर्जी चेक का भुगतान रोक दिया गया.
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बताते हैं, “श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्टेट बैंक की भुगतान शाखा से दो फर्जी चेक और फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से दो लाख 50 हजार एवं तीन लाख 50 हजार पंजाब नेशनल बैंक में ट्रांसफर किए गए हैं. धन निकालने के लिए जिन चेक का प्रयोग किया गया उस क्रम संख्या के चेक ट्रस्ट की चेक बुक में ही मौजूद है. आश्चर्य की बात है कि बदमाशों को ट्रस्ट के बैंक का अकाउंट नंबर कैसे पता चला? बदमाशों को यह भी कैसे पता लगा कि इन नंबरों के चेक नहीं इश्यू हुए हैं, यह जांच का विषय है.” इस प्रकार कुल 6 लाख रुपये पंजाब नेशनल बैंक के अकाउंट में जालसाजी करके ट्रांसफर हुए. एक ही आदमी द्वारा तीन बार चेक लगाया गया तो यह बैंक को खटका. दो चेकों के माध्यम से 6 लाख रुपये का भुगतान हुआ लेकिन पीएनबी अकाउंट से 4 लाख रुपये तुरंत निकाल लिए गए, दो लाख रुपये अभी भी पीएनबी बैंक में बचा है, उसे फ्रीज करा दिया गया है.
मामले की जांच में लगी पुलिस को आशंका है कि जिस क्रम संख्या के चेक से फर्जीवाड़ा किया गया यकीनन उससे पहले के क्रम संख्या वाले चेक की प्रति को ठग ने प्राप्त कर लिया होगा. इससे ठग ने क्लोनिंग कर फर्जी चेक तैयार किया होगा. अयोध्या के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजेश राय बताते हैं, “इस मामले की जांच के लिए दो टीमें बनाई गई हैं, जिन्हें जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया है. एक टीम भारतीय स्टेट बैंक लखनऊ की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है. यहीं से फर्जीवाड़ा किया गया है. पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.” अब तक की जांच में पता चला है कि पंजाब नेशनल बैंक की महाराष्ट्र स्थित ब्रांच में भुगतान के लिए एक क्लोन चेक लगाया गया था. क्लोन चेक की मूल कॉपी बैंक में ही मौजूद रही.
वहां से चेक की इमेज स्कैन करके लखनऊ के केंद्रीय क्लीयरेंस हाउस को भेजी गई. चेक पर ट्रस्ट के खातेदारों के सिग्नेचर हूबहू होने के कारण बैंक ने जांच कर भुगतान की अनुमति दी. एसबीआइ के एक बैंक अधिकारी बताते हैं, “एक व्यवस्था के तहत एसबीआइ पांच लाख से अधिक का चेक होने पर बैंक खाताधारक को फोन कर उनसे भुगतान की सहमति लेता है. ऐसे में जब नौ लाख रुपए से अधिक का चेक भुगतान के लिए आया तो अनुमति के लिए ट्रस्ट के सचिव चंपत राय का फोन किया गया. इसके बाद ही मामला सामने आया.” अयोध्या के पुलिस के अधिकारी पूरी गोपनीयता और सतर्कता बरतते हुए इस मुद्दे की जांच कर रहे हैं. पुलिस ने जालसाजी करने वाले युवक की पहचान कर ली है. यह युवक महाराष्ट्र का रहने वाला है. जांच के लिए दो टीमें अयोध्या से भेजी गई हैं, एक टीम लखनऊ व दूसरी टीम महाराष्ट्र भेजी जा रही है.
हालांकि इस पूरे प्रकरण ने क्लोन चेक को पकड़ने की बैंकों की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से रिटायर जनरल मैनेजर डी. पी. गोयल बताते हैं, “भुगतान लेने वाली बैंक जो कि चेक को क्लीयरिंग के लिए प्रेजेंट करती है उसे चेक की इंक जांच और अन्य सुरक्षा जांच करनी होती है. इससे क्लोन चेक पकड़ में आ जाता है. ऐसे में यह भी आशंका है कि इस पूरे प्रकरण में बैंककमिर्यों की भी मिलीभगत हो.”
राम मंदिर के नाम पर इससे पहले भी धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है. ट्रस्ट ने इस मामले में भी 12 अप्रैल को अयोध्या कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था. राम मंदिर के नाम पर दिल्ली निवासी एक युवक ट्रस्ट का लोगो लगाकर मंदिर निर्माण करने के लिए रामलला के नाम से ट्विटर अकाउंट और राममंदिर के नाम से वेबसाइट बनाकर दान एकत्र कर रहा था. ट्रस्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राम मंदिर के नाम पर बनाए गए फर्जी वेबसाइट तथा अकाउंट को तुरंत बंद कराते हुए अयोध्या कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था.












