मेड पर करे अरहर की बुवाई-डॉ सुरेन्द्र प्रताप सोनकर
संकल्प सवेरा, जौनपुर।खरीफ की दलहनी फसलों में अरहर प्रमुख फसल है। मेड पर बुवाई करने से कम लागत और उत्पादन ज्यादा मिलता है। और अधिक वर्षा होने पर फसले खराब होने से बच जाती है।
मिट्टी;- अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
बुवाई का समय:- वर्षा प्रारंभ होने के साथ ही मध्य जून से मध्य जुलाई तक बुवाई कर देनी चाहिए।
बीज की मात्रा;-अरहर की अच्छी पैदावार के लिए 12 से 15 किलो/हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है।
प्रमुख प्रजातिया:- अरहर की प्रजातियों में जैसे, नरेन्द्र अरहर -1, नरेन्द्र अरहर 2, मालवीय विकास, मालवीय चमत्कार, अमर, एव आजाद आदि है।
उत्पादन:- अरहर की फसल 250 से 270 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। जिनका उत्पादन 25से 32 कुन्तल प्रति हेक्टेयर मिलता है।
बुवाई की विधि:- अरहर की बुवाई मेड पर करने से ज्यादा लाभ मिलता हैं। मेड से मेड की 55 से 60 से.मी. और पौध से पौध 20 से 30 से.मी. की दूरी पर बुवाई करनी चाहिए।
डॉ सुरेन्द्र प्रताप सोनकर,
कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केन्द्र बक्शा, जौनपुर
नरेन्द्र देव कृषि वि. वि. अयोध्या।












