खुटहन जौनपुर उसरौली शहाबुद्दीनपुर का आदर्श रामलीला धर्म मण्डल मंच पर अभिनेताओ द्वारा रविवार को धनुष यज्ञ, बाणासुर रावण संवाद लीला का को देखकर भावबिभोर हो गए।जब यज्ञशाला में आमंत्रित बलशाली राजाओं व योद्धाओं ने शिव धनुष तोड़ने में विफल हो गए। धनुष तोड़ने की बात तो दूर रहा वे सभी उसे हिला तक नही पाए और प्रणाम करके अपने स्थान पर आकर बैठ गए।तो मिथिला नरेश जनक को बहुत ग्लानि व पछतावा हुआ। उन्होंने ने रुंधे स्वर से व निराशा जनक शब्दों में कहा कि लगता है कि विधाता ने सीता के भाग्य में व्याह लिखा ही नही है। इस बात को सुनकर लक्ष्मण क्रोधित होकर खड़े हो गए।रोष भरे शब्दों में कहा कि जिस दिन वीर नही होंगे उस दिन धरती नही रहेगी।
जिस सभा में सत्य हरिश्चन्द्र के वंशज व करुणा निधान प्रभूश्रीराम स्वयं विराजमान हो। तो जनक द्धारा कहे गए कटु शब्द हम क्षत्रियों के लिए अनुचित व घोर अपमान है।प्रभू भाई श्रीराम की आज्ञा मिल जाए तो इस धनुष को अंगुरिया के बल कोसों दूर लेकर चला जाऊं।प्रभु श्रीराम ने अनुज लक्ष्मण का गुस्सा शांत कराया। गुरु विश्वामित्र का आज्ञा पाकर श्रीराम ने शिव धनुष को तोड़ दिया। धनुष टूटते ही प्रभू जायकारों से लीला परिसर गूंज उठा। मां सीता द्धारा श्रीराम के गले में वरमाला डालते ही लोग प्रभू भक्ति में डूब गए।
गायक के रूप में सत्यम मंचला द्धारा भगवान श्री रामचन्द्र की महिमा से संबन्धित प्रस्तुत भजन सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए।व्यास संजय दुबे ने मानस की चौपाइयों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन प्रियतोष पाण्डेय ने किया। राधेश्याम उपाध्याय बद्री प्रसाद पाण्डेय संगम पाण्डेय मुन्ना पाण्डेय हमेश पाण्डेय अजय पाण्डेय राजू पाण्डेय राजन मिश्रा शिवम् सिंह साँवले शर्मा अरविन्द तिवारी मुन्ना उपाध्याय आल्हा हर्ष अर्पित पाण्डेय आदि रहे। 












