…बड़ी मुख्तसर सी है मेरी “जिंदगी की शाम”
ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है रितेश
धरती के भगवानों के यहाँ दस्तक दे-देकर थक चुकी है एक माँ
रिपोर्टर जेड़ हुसैन “बाबू”
जौनपुर,संकल्प सवेरा। शहर से सटे एक छोटे से गाँव चांदपुर में एक माँ है जो आज भी अपने बेटे की जिंदगी के लिए रात को उठ कर रोया करती है। खुदा (ईश्वर) से अपने बेटे की जिंदगी की भीख मांगती है। रात ढल जाती है और फिर सुबह जिन्दगी की तमाम परेशानियों से दो-चार होने के बाद अपने बेटे को लेकर जौनपुर के अलावा और कई बड़े शहरों के कई डॉक्टरों के यहाँ उसे लेकर पहुँच जाती है। एक बेबस माँ की आँखों में बस यही उम्मीद है कि कोई तो उसके बेटे को बचा ले। बेटे रितेश पाल को ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने अपने जद में ले रखा है।
ब्लड कैंसर के मरीजों में ल्यूकीमिया इत्यादि में अक्सर बुखार होना इसके शुरुआती लक्षण है। ब्लड कैंसर के मरीज को अचानक से नाक से भी खून आने लगते हैं। हड्डियों और जोड़ों में दर्द होना सिर्फ अर्थराइटिस ही नहीं ब्लड कैंसर के भी लक्षण हैं। ब्लड कैंसर की स्टेज और अन्य कैंसर की स्टेज में काफ़ी अंतर होता है। अगर ब्लड कैंसर है तो शरीर की हर कोशिका में ब्लड होता है इसमें स्टेज का ज्यादा लेना देना नहीं होता है। इस जानलेवा बीमारी के उपचार के लिए कीमोथेरेपी रक्त कैंसर के लिए सबसे आम उपचार विधियों में से एक है। यह प्रक्रिया उन कोशिकाओं को नष्ट करती है जो शरीर में तेजी से बढ़ रही हैं। रेडिएशन का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए किया जाता है।
हर बार कैंसर जानलेवा ही हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन यह महंगा बहुत है, इस से इनकार नहीं किया जा सकता। कैंसर का महंगा इलाज अमीर-गरीब और मध्यवर्ग, सब की कमर तोड़ देता है। ङ्क्षरतेश पाल के हालात को देखकर यह कहा जा सकता है कि बड़ी मुख्तर सी है उसके जिन्दगी की शाम।












