हमारे देश में सेक्युलरिजम बहुत पुराना नासूर है ,यूं कहे कि सेक्युलरिजम एक गंभीर बीमारी है जिससे ना सिर्फ हिन्दू बल्कि अधिकतर अन्य कौम पीड़ित है । आपको याद होगा न्यूजीलैंड में गत कुछ वर्ष पहले एक मुस्लिम कट्टरपंथी ने मशीनगन से एक चर्च में ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए 27 ईसाईयों को दिवंगत कर दिया बाद में जब उसे गिरफ्तार किया गया तो उसने कहा हम इस्लाम चाहते है सेक्युलर इस्लाम । भारत में जे एन यू ,जामिया मिल्लिया और जौहर विश्वविद्यालय जैसी संस्थाएं ऐसे ही सेक्युलरिजम के पौधरोपण हेतु निर्मित है । हिंदुस्तान की खाकर ओवैसी जैसे लोग हिन्दू मंदिरों के विरोध में खड़े होकर खुलेआम उल्लुल जुलूल बकते है आखिर इनके खिलाफ सेक्युलर फतवे क्यो नही जारी होते ? क्यों नहीं कांग्रेसी सड़कों पर ऐसे दोहरे मानसिकता वाले पाकिस्तान परस्त लोगो के खिलाफ नारेबाजी करते जो भारत में मन्दिर गिराने की बात करते है । क्यों अखिलेश यादव और मायावती जैसे अवसरवादी हुक्मरान केवल वोट बैंक देख रहे ? जब भी रामायण कृष्णा या महाभारत जैसे सिरियल्स देखता था तो उसमें युद्ध के दृश्य देखकर बड़ी हँसी आती थी , मैं देखता था की कैसे एक योद्धा धनुष पर बाण चढाकर आँख बंद कर दो चार मंत्र बुदबुदाता था और तीर छोड़ देता था। इससे कभी उस तीर के आगे बिजली चमकने लगती थी , तो कभी आग जल उठती थी और अग्नि की बारिश होने लगती थी। फिर दोनों ही पक्षों के तीर बराबर एक दूसरे से आकर टकराते थे । अर्जुन रावण मेघनाथ और भीष्म पितामह के तीर तो और अनोखे होते थे ,वो चलाते एक तीर थे कुछ ही दूर चलकर वो हजारों तीर में बट जाते थे । मन सोचता था कि क्या ऐसे भी होता होगा क्या ये परिकल्पना किसी थ्योरी की जननी है ?
हमेशा लगा कि ये कैसे हो सकता है, क्या बकवास परिकल्पना है ,चमत्कार है तो तीर की क्या आवश्यकता आंखे तरेर के भी धराशाई कर दिया जा सकता था ,लेकिन पहले 370 और तीन तलाक बैन होने का दिन आया फिर भूमिपूजन का दिन आया और हम सबने वहीं एक तीर से हजार तीर वाला सीन पुनः देखा । अब मुझे वो परिकल्पना समझ में आ रही थी क्योंकि मोदी जी ने भारत के हित में अपने संकल्प रूपी धनुष पर ” धारा 370 विध्वंसक, तीन तलाक विनाशक और रामन्दिर स्थपनात्मक ” वाला तीर चढाया, मंत्र फूंका और तीर छोड़ दिया सेक्युलर कट्टरपंथियों की तरफ ।मै आश्चर्यचकित रह गया क्योंकि मै क्या देखता हूँ, ये छोड़े गए तीर अचानक से एक से बदलकर हजार तीरों में बँट गए ,एक तीर जाकर ममता बैनर्जी एंड कम्पनी को लगा , हजार तीर राहुल प्रियंका सहित उन तमाम कांग्रेसीयों को लगा जो सेक्युलरिजम का चोला ओढ़े जनता के बीच छुपे थे । सौ तीर उन समाजवादियों को लगा जो आजम खां ,बर्क जैसे लोगो का पनाहगार बना हुआ है , कुछ तीर वामपंथियों को लगा ,एक तीर तो सीधे कन्हैया कुमार जैसे महावामपंथ सेक्युलर को लगा और वो धराशाई , कुछ तीर ओवैसी की पार्टी ए एम अाई एम के वारिश पठान और उनके गुर्गों को लगा जिनके मुंह से आह उह भी ठीक से नहीं निकल रही और बस मोडी मोडी करके बिलबिला रहे ,एक तीर रबिस कुमार को लगा ,कुछ तीर पाकिस्तान गये , कुछ तीर शाहीन बाग के रास्ते जामिया की ओर गये ,.कुछ सीधे जे एन यू के सेक्युलर गैंग में घुस गए ।
बात यही नहीं समाप्त हुई , मोदी जी उधर दंडवत हुए ही थे कि एक तीर मुंबई की ओर चल निकला उसे बीच में शरद पवार के सेक्युलरिजम ने लपक लिया ।मुख्य तीर सीधे औवेशी को जाकर लगा जिसने तुरंत कहा मस्जिद थी और रहेगी (क्योंकि मस्जिद गलत थी और ख़यालो में रहेगी , ये बोलने वाले थे महानुभाव ) कुछ तीर अपनों को भी लगे जैसे मोदी को फेकुं बोलने वालों को मोदी को भिकास भिकास करने वाला बोलने वालों को , मोदी कुछ नहीं कर सकता बोलने वालों को , मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे करने वाली मीडिया को ,अयोध्या से चला तीर देश के हर कोने में गया ,ट्विटर से लेकर फेसबुक तक गया ,घायलों के कराहने की आवाज देश के सभी कोने से आ रही है अब यह देख मुझे विश्वास हो गया कि रामायण, महाभारत में दिखाये जाने वाले युद्ध के दृश्य मनघडंत अथवा अतिश्योक्ति पूर्ण नहीं हैं ।आज भी एक तीर से कई निशाने एक साथ लगाये जा सकते हैं ।अग्नि लगाई जा सकती है ,बस आवश्यकता है तो एक धर्म प्रेमी निष्ठावान व कुशल तीरंदाज की । आज हमारा देश सच्चे हिंदुस्तान होने की दिशा में चल निकला है । मैंने कुछ दिन पहले ही लिखा था कि “अयोध्या तो बस झांकी है अभी काशी मथुरा बाकी है” । आगे काशी और मथुरा का भी उद्घार तय है । जय हिन्द ।
पंकज कुमार मिश्रा ( अस्सिटेंट प्रोफेसर , स्वतंत्र पत्रकार 8808113709)












