.महंगा हो गया अंतिम सफ़र का सामान
रामघाट पर लकड़ियों के दाम हुए दोगुने
जिंदगी जीने की जद्दोजहद में महंगी हो गईं साँसे
जेड हुसैन (बाबू)
जौनपुर, संकल्प सवेरा। कोरोना वायरस का नग्न तांडव इस समय पूरे देश में चल रहा है। हर रोज मौतों का आंकड़ा नए रिकॉर्ड बना रहा है। पूरे देश के शमशान घाटों पर मुर्दे वेटिंग में हैं। जौनपुर जिला भी इस महामारी की जद में है। ऑक्सीजन, बेड और जीवन रक्षक दवाओं के लिए मारामारी है। वही जिला प्रशासन का दावा है कि सब चंगा सी। बावजूद इसके हकीकत कुछ और ही है। जिले के रामघाट पर इस समय लाशों की आमद में भारी इजाफ़ा हुआ है। वहाँ मौजूद अंतिम संस्कार करने वालो का कहना है कि हर दिन 100 से अधिक लाशें आ रही है, हालांकि ये सरकारी आँकड़ा नही है। वहाँ पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने आये लोगों ने बताया कि भईया लकड़ी बहुत महंगी मिल रही है। जो लकड़ी पहले 200-250 मन बिक रही थी वही अब 450-500 रुपये मन मिल रही है। लकड़ी बेचने वाले सौदागरों का कहना है कि डिमांड बढ़ने के कारण दाम बढ़ा है। अगर लेना है तो लो नही तो दफा हो जाओ। वही इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोग मौन है या यूँ कहे बेबस है। अगर सिस्टम (सरकार) की बात की जाए तो इनडाइरेक्ट में पता चलता है कि हालात अब उनके बस के बाहर जा चुके है। कुल मिलाकर आत्म निर्भर भारत में इस समय ये कहा जा सकता है कि महंगा हो गया अंतिम सफर का सामान।












