खेतासराय व सबरहद में सुबह से लगती है लाइन
खेतासराय(जौनपुर)यदि आपको आधार कार्ड बनवाना है या फिर संशोधन कराना है तो ठहरिये! आधार कार्ड की प्रक्रिया पूर्ण कराने से पहले डाकघर व बैंक के किसी कर्मचारी के सम्पर्क या कोई अन्य माध्यम के अतिरिक्त रकम रख लीजिए फिर आधार कार्ड बनवाने व अपडेट कराने के बारे में सोचिये। यदि नहीं है तो आधार कार्ड बनवाने व संशोधन कराने का काम राम भरोसे छोड़कर घर बैठ जाईये। जी हां यह खेल खेतासराय डाकघर व सबरहद के ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों द्वारा खेला जा रहा है। कार्डधारकों ने समाचार के माध्यम जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
बताते चले कि किसी भी कार्य के लिए आधार कर्ड अनिवार्य है। आधार कार्ड न देने से कार्य रुक जाता है जिसके पास पहले से आधार है और उस पर कोई त्रुटि है उसको संशोधन और नया बनवाने के लिए इधर – उधर भटकना पड़ रहा था। महज़ चन्द दिन पहले खेतासराय स्थित डाकघर व सबरहद स्थित ग्रामीण बैंक में आधार कार्ड बनने व संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू हुई ऐसे में आधार कार्ड बनवाने व संशोधन कराने के लिए भारी भीड़ एकत्र हो रही है। इस दौरान कोविड-19 को देखते हुए जारी निर्देशो की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। इस पर न तो शासन और न ही प्रशासन की तरफ़ से सरकार के निर्देशों का पालन कराने के लिए कोई ठोस प्रयास किया जा रहा है उक्त डाकघर और बैंक में बन रहे आधार कार्ड बनवाने व संशोधन कराने के लिए सूरज निकलने से पहले फार्म के लिए भारी भीड़ एकत्र हो जाती है और लंबी लाइन लग जाती है जिसमें बच्चे, बुजुर्ग व महिला एक ही लाइन में खड़े होकर फार्म पाने के लिए जद्दोजहद करते है। वहाँ पर न तो सही ढंग से लाइन में खड़ा कराकर फार्म वितरण करने के व्यवस्था और न ही कोई अन्य संशाधन है इतना ही नहीं बल्कि महिला व बच्चों के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। जिससे एक ही लाइन में महिला बच्चे व बुजुर्ग खड़े होने को विवश है। दूसरी बात यह है कि इस धक्का-मुक्की की लाइन में महिलाएं अपने आपको को असहज महसूस करती है।
बावजूद इसके आधार कार्ड बन भी नहीं पाता मायूस होकर ऐसे व्यवस्था पर सरकार और जिम्मेदारों को कोसते हुए लोग खाली हाथ वापस लौट जा रहे है। सरकार कोविड-19 को देखते हुए जारी निर्देशों को कड़ाई के साथ पालन कराने का आदेश दिया है। लेकिन इस आधार बनवाने में सब स्थिति मटियामेट हो रहा है। इस पर न तो कोई जिम्मेदार दिख रहा है न ही कोई आवाज उठा रहा है। खुदा न खासता सोचिये यदि अनजाने कोई संक्रमित इस भीड़ में पहुँच गया तो परिणाम क्या होगा। खैर डाकघर में बन रहे आधार कार्ड के सम्बंध में उपभोक्ताओं का कहना है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए दूर-दराज से आकर किसी तरह लाइन में खड़े होते है जब तक नम्बर आता है तब तक खिड़की बन्द हो जाती है। एक दिन में मात्र 20 लोगों का आधार कार्ड बन पा रहा है।
बाकी कल आने की बात कहकर टाल दिया जाता है। इसके बाद जब सब चले जाते है तो डाककर्मचारी अपने चहेतों को बुलाकर आधार कार्ड बना देते है। वही आरोप यह भी है की डाक कर्मचारी व बैंक कर्मचारी अपने चहेतो को आराम से बैक डोर से काम करा दे रहे है। चर्चा यह भी जोरो में है कि सबरहद बैंक में आधार बनाने वाला ऑपरेटर भी कार्ड धारकों से रकम लेकर टाइम देकर बुलाकर बना देता है वहीं जिसका कोई सम्पर्क या माध्यम नहीं है उसका काम राम भरोसे ही है और काम नहीं हो रहा है। जिससे सरकार द्वारा चलाएं जा रहे विभिन्न महत्वकांक्षी योजनाओ का लाभ लेने से गरीब वंचित रह जाता है।












