संकल्प सवेरा पीस लिली के पौधे के अंदर हवा शुद्ध करने का विशेष गुण होता है। नासा के रिसर्च के मुताबिक, पीस लिली का पौधा भी घर में प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करता है। अमेरिका और दक्षिण पूर्व एशिया मूल के इस पौधे का वैज्ञानिक नाम पाथीफाइलम है। इस सदाबहार पौधे को लगाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती। इस पौधे में फूल सामान्य रूप से बसंत ऋतु में खिलते हैं।
खासियत: यह पौधा हवा से ट्राईक्लोरोइथीलीन, बेंजीन, ज़ाइलीन, फॉर्मल्डेहाइड, टोल्यूनि और अमोनिया जैसी अशुद्धियों को दूर करके हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करता है। पीस लिली के पौधे की आयु सामान्य तौर पर तीन से चार वर्ष होती है। यदि इसकी अच्छे से देखभाल की जाए यह चार से पांच साल तक चल जाता है। यह हवा को 60 फीसद तक शुद्ध करने की क्षमता रखता है। इस गुण के कारण यह दमा या सांस के रोगियों के लिए बेहतर होता है। बरसात और सर्दी के मौसम में यह फफूंदी नहीं लगने देता।
प्रजातियां: पीस लिली की मुख्यतः चार प्रजातियां पीस लिली, कोबरा लिली, स्पेथ लिली और पाथीफाइलम लिली पायी जाती हैं। इसके फूल की लगभग 40 प्रजातियां पायी जाती हैं।
कैसे लगाएं: पीस लिली के पौधे को आसपास की नर्सरी से खरीदने के अलावा आप पुराने पौधे से भी नए पौधे तैयार कर सकते हैं। पीस लिली का पौधा कुछ साल में काफी घना हो जाता है और उसमें से नए पौधे अंकुरित होने लगते हैं। इसके लिए पहले पुराने पौधे को गमले बाहर निकालें। फिर जड़ों में चिपकी मिट्टी को साफ करें और नए निकल रहे पौधों को जड़ सहित अलग करके नए गमलों में रोपें।
देखभाल के टिप्स: पीस लिली के पौधे को उज्जवल रोशनी या छाया में रखें। इसे सूर्य की सीधी रोशनी में न रखें, वरना इससे पौधा सूख जाएगा। इस पौधे को पानी की अधिक जरूरत नहीं होती। गर्मी के मौसम में इसे दिन में एक बार ही पानी देना चाहिए। क्लोरीनयुक्त पानी पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा साल में एक बार पौधे कंपोस्ट खाद और गर्मी के मौसम में दो से तीन बार आर्गेनिक लिक्विड फर्टीलाइजर दें।












