बसपा के अभेद किले को ढहाने में जुटे विपक्षी दल

जनता में लोकप्रिय है टंडन परिवार, दो दशक से नपाप पर है कब्जा
जेड हुसैन बाबू
जौनपुर। नगर पालिका परिषद जौनपुर के चुनाव को लेकर सभी पार्टियां तैयारी कर रही हैं। पूरे शहर में सिर्फ टंडन परिवार का नाम की हर एक की जुबां पर है। चर्चाओं का बाजार गरम है कि आखिर टंडन को परास्त कौन करेगा?
टंडन परिवार को हराने के लिए सभी माथापच्ची में जुटे हुए हैं लेकिन अभी तक कोई पार्टी किसी ठोस, मजबूत और टिकाऊ प्रत्याशी को ढूंढ नहीं पायी है जो बसपा के इस अभेद किले को ढहा सके। बहरहाल नगर पालिका जौनपुर के इतिहास की बात करें तो 1994 से जब मतदाताओं द्वारा अध्यक्ष पद का चुनाव शुरू हुआ तो 1995 में संध्यारानी श्रीवास्तव पहली अध्यक्ष के रूप में चुनी गई और उन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा किया। इसके बाद 2000 में दिनेश टंडन ने दावेदारी ठोकी और नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर काबिज हो गये थे। वर्ष 2000 में अध्यक्ष चुने जाने के बाद से लेकर अभी तक नगर पालिका परिषद पर उनका वर्चस्व अभी भी बरकरार है। अपने शुरूआती पांच साल में उन्होंने हर गली, हर मोहल्ले में अपने नाम का शिलापट्ट लगवा दिया अर्थात शहर का खूब विकास किया। यही वजह रही कि शहरी क्षेत्र की जनता में उनकी लोकप्रियता रिकॉर्ड तोड़ दर्ज की गयी। इसके बाद दिनेश टंडऩ ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। दिनेश को 15766 वोट मिले तथा कांग्रेस के आदर्श सेठ को 12901 मत हासिल हुए। जौनपुर नगर पालिका में दो दशक से अधिक समय से टंडन परिवार का कब्जा बरकरार है। इस बार भी यह सीट सामान्य महिला कर दी गई है और टंडन एक बार फिर मैदान में है, वहीं भाजपा, कांग्रेस और सपा के भी कई मजबूत उम्मीदवार टिकट लेने के लिए ललायित हैं।












