मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार
आज से चलेगा विश्व स्तनपान सप्ताह
विशेषज्ञ बोले-स्तनपान कराने वाली महिला में होता है आक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव, स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर जैसी बीमारियों से होता है बचाव
संकल्प सवेरा जौनपुर नवजात शिशु के सर्वांगीण विकास और पोषण के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार माना जाता है। यह शिशु का मौलिक अधिकार भी है, । फिर भी भ्रांतियों के चलते कुछ माताएं स्तनपान नहीं करातीं हैं ।
विशेषज्ञ भी मां के दूध का दूसरा कोई विकल्प नहीं बताते हैं। यह न सिर्फ बच्चों को सम्पूर्ण पोषण देता है बल्कि उन्हें कुपोषण, डायरिया (दस्त) व निमोनिया जैसी कई बीमारियों से बचाता भी है । इसके साथ ही स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी आक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव, स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है।
जिला चिकित्सालय के में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ दीपक जायसवाल का कहना है कहते हैं कि स्तनपान कराने वाली महिला के शरीर में आक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव होता है। इससे स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और आस्टियोपोरोसिस (हड्डी रोग) जैसी बीमारियों से बचाव होता है। शारीरिक संरचना के ढंग खराब होने का डर अथवा कामकाज के दबाव में कुछ माताएं बच्चों को स्तनपान नहीं करातीं हैं।
स्त्री एवं प्रसूति ती रोग विभाग की मानें तो ग्रामीण महिलाएं भी प्रसव के तत्काल बाद नवजात को तत्काल दूध पिलाने से बचतीं हैं। भ्रांतियां इसका मुख्य कारण महज भ्रान्ति हैं।
डॉ. दीपक बताते हैं कि मां के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है। इसलिए छह माह की आयु तक प्यास लगने पर भी शिशु को सिर्फ मां का दूध देना चाहिए। छह माह तक केवल स्तनपान कराने पर बच्चों में होने वाले आम रोग जैसे दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमश: 11 व 15 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है।
कैसे पता करें कि मां का दूध पर्याप्त है या नहीं :
डॉ दीपक बताते हैं कि यदि शिशु दिन में छह बार पेशाब कर रहा हो, आराम से सो रहा हो और उसका वजन बढ़ रहा हो तो समझिए शिशु स्वस्थ है।
एक घंटे के अंदर स्तनपान जरूरी :
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइड लाइन के अनुसार जिन शिशुओं को एक घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनमें नवजात मृत्यु की संभावना 33 फीसदी अधिक होती है, उनके सापेक्ष जिन शिशुओं को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान की शुरुआत कराई जाती है।
छह माह तक सिर्फ स्तनपान, पानी भी नहीं –
रीप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ सत्य नारायण हरिश्चंद्र का कहना है कि डिब्बा बंद दूध या कोई ऊपरी पेय पदार्थ, स्तनपान का विकल्प नहीं हो सकता। ऊपरी पेय पदार्थ शिशु का पेट तो भर सकते हैं लेकिन उनके सम्पूर्ण पोषण की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकते। जो शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक होता है। इसलिए चिकित्सक की सलाह के बिना शिशु को छह माह तक स्तनपान के अतिरिक्त ऊपर से कुछ भी नहीं देना चाहिए। पानी भी नहीं।












