रिपोर्ट -: आकाश मिश्रा
जौनपुर जनपद का मल्हनी विधानसभा में उप चुनाव हो रहा है।सपा की मजबूत सीट है, मल्हनी, पहले रारी के नाम से जानी जाती थी और धनन्जय सिंह दो बार निर्दल विधायक रहे ,उनके सांसद बन जाने के बाद उनके पिता राजदेव सिंह बसपा से विधायक बने।

धनन्जय सिंह निषाद पार्टी से लड़ना चाहते थे, पिछली बार लड़े थे नम्बर दो पे थे, लग रहा था BJP ये सीट निषाद पार्टी को दे देगी, लेकिन ऐसा हुआ नही, धनन्जय सिंह कोरोना काल में लॉक डाउन के समय आरएसएस के साथ मिलकर लगभग75 दिनों तक लोगो की खाने पीने का राशन बाटा था तो जनता को भी लगा था कि, बीजेपी में धनन्जय की पैठ बन गई है।लेकिन टिकट के समय बाहुबली बना के दूरी बना ली गई जब मदद कर रहे थे तो सब चेहरे साथ थे जब मदद मांगी तो बाहुबली बना दिया गया।

धनन्जय को जानने वाले ये लगातार कह रहे थे कि धनन्जय मल्हनी से लड़ेंगे जरूर चाहे टिकट मिले या नहीं, हुआ भी वही जब तक और पार्टी वाले अपनी अंगड़ाई तोड़ने में लगे थे तब तक धनन्जय सिंह ने एक साथ सारे बूथों से अपने कार्यकर्ता मैदान में उतार दिए।अचानक मल्हनी धनन्जय, धनन्जय के नाम से गूंज उठा, इस बार की रणनीति गजब की बना ली है, कार्यकर्ता बूथ पे हैं और नेता मल्हनी में दौड़ लगा रहा है।

अचानक आज रात8 बजे धनन्जय की पत्नी श्रीकला धनन्जय लखनऊ से सीधे गांव बन्सफा पहुची और बड़े लोगो के आशीर्वाद से प्रचार सुरु करके लोगो को, आश्चयर्जनक रूप से खुशी से भर दिया, सामने बहु देख गांव घर वाले गदगद हो गए।

श्रीकला धनन्जय राजनैतिक और उद्योगपति घराने से है, निप्पो समूह के खानदान की बेटी हैं, पिता तेलगांना के हुजुर नगर से निर्दल विधायक हुआ करते थे। यानी कि राजनैतिक कुशलता उनको विरासत में मिली है।
श्रीकला धनन्जय की राजनैतिक कुशलता लोगो ने आज पहले ही दिन देख ली, जितने प्यार से उन्होंने अपने बड़ो का पैर छूकर आशीर्वाद लिया और बुजुर्ग महिलाओं से, अपने उमर की औरतों से, लड़कियों से तथा बच्चो को गोद में लेकर जो आगाज किया है उससे यह संकेत मिलता है, जैसे अपने पति को यह कह रही हो कि चिंता ना करो मैं भी आ गई हूं, दोनो मिल के मल्हनी को गोद मे उठा लेंगे।
सबसे मिलती रही और अपना रिश्ता भी पूछती रही, कौन सास लगेगी, कौन भाभी, कौन ननद, कौन जेठ और कौन देवर, बुजुर्गों ने भी आशीर्वाद दिया मन से कि- “पति के विजय में सहायक बनो, बामांगी हो मिलकर विजय माला अंगीकार करो”

धनन्जय जौनपुर की राजनीति में खुद सनसनी है, आज श्री कला धनन्जय भी नए आकर्षण के रूप में आ गई यानी ताकत दुगुनी
हो गई है।
2002 के चुनाव में धनन्जय की दिवंगत माता जी ने धनन्जय को गजब की शक्ति दी थी, मा की ममता सीधे ब्राह्मणों के द्वार पे गई थी।पंडितों के आशीर्वाद से धनन्जय ने जो माहौल बनाया था कि इतिहास ही रच दिया।
आज फिर धनन्जय की राजनीति पे राहु केतु का ग्रहण लगा हुआ है, जौनपुर का सबसे ताकतवर और लोकप्रिय नेता अपने राजनैतिक सूर्य को नही चमका पा रहा है यह सोचनीय बात है।
श्रीकला धनन्जय निश्चित रुप से ग्रहण को काटने में सहायक होंगी, अब मल्हनी में दो आंधियों का प्रचार सुरु होगा, एक तरफ से श्री कला चलेंगी और दूसरी तरफ से धनन्जय सिंह।
लगता है चुनाव फिर से ब्राह्मणों के आशीर्वाद से सुरु होगा और इतिहास फिर से रचा जाएगा।
मल्हनी के संग्राम में हलचल मचाएंगी श्री कला धनन्जय ये तो निश्चित है।












