उपचुनाव 2020: मल्हनी विधानसभा का किया गया राजनैतिक विश्लेषण
2012 के नए परिसीमन के बाद से उत्तर प्रदेश की मल्हनी विधान सभा जो 1951 के पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जौनपुर दक्षिण विधानसभा तथा 1957 से लेकर 2009 तक के उपचुनाव तक रारी विधानसभा के नाम से जानी जाती रही इसके परिसीमन के अनुसार नाम बदलते रहे किन्तु इस विधानसभा की प्रकृति आज तक नहीं बदली। जानकारी के अनुसार मुख्य विधानसभा चुनाव तथा उपचुनाव को मिलाकर इस विधानसभा से कुल उन्नीस (19) बार चुनाव लड़े गए जिसमें से सात (7) बार क्षत्रिय प्रत्याशियों नें तथा आठ (8) बार यादव (अहीर) प्रत्याशियों नें अपने जीत का परचम अलग-अलग राजनैतिक दलों के/निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लहराया है अर्थात उन्नीस (19) में से पन्द्रह (7+8=15) बार क्षत्रिय या यादव उम्मीदवार ही इस सीट से जीतते आए हैं। इस प्रकार के लगातार परिणाम आने का कारण इस क्षेत्र की जनता का जातिगत समीकरण है अर्थात इस क्षेत्र में क्षत्रिय तथा यादव मतदाता सर्वाधिक हैं बाकी जातियाँ/उपजातियाँ क्षत्रिय/यादव उम्मीदवार को चुनावों में अतिरिक्त शक्ति प्रदान करती हैं। इस सीट से उत्तर प्रदेश में अपने समय पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हर दल को प्रतिनिधित्व का मौका मिला है अर्थात किसी एक दल की यह विधानसभा जागीर कभी नहीं रही है और यही कारण है कि इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी भी जीतते आए हैं बशर्ते वे क्षत्रिय/यादव जाति से हों।

चलिए यह तो वर्तमान मल्हनी विधानसभा के राजनैतिक प्रकृति की बात हुई। अब आइए इस सीट से समाजवादी पार्टी के वर्तमान विधायक पारसनाथ यादव के मृत्यु के उपरांत उपचुनाव के लिए पुनः तैयार इस सीट के वर्तमान राजनैतिक परिस्थिति को देखते हुए चर्चा करें। जैसा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जरा सी भी राजनैतिक रुचि रखने वाले बच्चे को ज्ञात है कि समाजवादी पार्टी एंव यादव समाज एक दूसरे का शत प्रतिशत पूरक है, ऐसी स्थिति समाजवादी पार्टी के नेतृत्वकर्ताओं के जातिवादि व्यवहार की वजह से पैदा हुई है, जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आती है तो शासन-प्रशासन में यादवों की ही हनक चलती है।

1993 में लालजी यादव के जीत के साथ इस सीट पर बहुजन समाजवादी पार्टी के समर्थन से समाजवादी पार्टी का परचम लहराया। जिसकी पुनरावृत्ति समाजवादी पार्टी के 1996 के उम्मीदवार श्री राम यादव नें जीत का झण्डा गाड़कर पुनः की। इस सीट पर 2002 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय यूवा प्रत्याशी धनन्जय सिंह (47500 वोट) नें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राम यादव (33000 वोट) को हराकर समाजवादी पार्टी के हैट्रिक की आशा पर पानी फेर दिया। धनन्जय सिंह (46700 वोट) 2007 में पुनः इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से जनता दल (यूनाइटेड) के प्रत्याशी के रूप में अपनी ताल ठोकी तथा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार लाल बहादुर यादव (42500 वोट) को करारी शिकस्त दी। 2009 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में धनन्जय सिंह नें जौनपुर लोकसभा सीट से अपना पर्चा भरा और जीत का परचम लहराया। धनन्जय सिंह के सांसद बनने के कारण रिक्त हुई सीट पर उनके पिता राजदेव सिंह जी (77000 वोट) बहुजन समाजवादी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव लड़े तथा समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बाबा दुबे (60000 वोट) को परास्त किया। राजदेव सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन मजदूर संघ एंव किसान संघ के संरक्षक रहे हैं एंव वर्ष में एक बार होने वाले संघ के गुरुदक्षिणा कार्यक्रम में कभी भी गुरुदक्षिणा करना नहीं भूलते।
2012 के विधानसभा चुनाव में धनन्जय सिंह नें इस सीट से निर्दल प्रत्याशी के तौर पर अपनी पत्नी डॉ. जागृति सिंह (51000 वोट) को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पारसनाथ यादव जी (82000 वोट) के मुकाबले उतारा और दूसरे स्थान पर रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से निषादराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में धनन्जय सिंह जी (48000 वोट) नें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पारसनाथ यादव जी (69000 वोट) के साथ कड़ा मुकाबला किया एंव दूसरे स्थान पर रहे।
मल्हनी सीट के पिछले 18 साल के चुनाव के इतिहास को देखा जाए तो इस सीट पर से सीधा मुकाबला धनन्जय सिंह बनाम समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार रहा है या कहा जाए तो क्षत्रिय बनाम समाजवादी पार्टी के यादव उम्मीदवार के बीच मुकाबला रहा है। धनन्जय सिंह का व्यक्तिगत 45000 से 50000 के बीच का वोट बैंक है। उनका यह वोट बैंक पिछले 18 सालों (2002-2020) से आज तक इस क्षेत्र के प्रत्येक स्थानीय उम्मीदवार के सुख-दुख में बराबर शरीक होने के कारण बन पाया है। जौनपुर जनपद के इतिहास में अपने कार्यकाल के दौरान सबसे अधिक हैंडपंप (लगभग 20000) धनन्जय सिंह नें ही बिना भेद-भाव के जिनको पानी की दिक्कत है उसके यहाँ लगवाया है। यदि अन्य दल उनका समर्थन अथवा उन्हें टिकट देते हैं तो यह व्यक्तिगत वोट बैंक उस दल के वोट बैंक के साथ मिलकर धनन्जय सिंह की जीत को तथा समाजवादी पार्टी के यादव उम्मीदवार की हार को सुनिश्चित कर देता है। कोई भी सत्ताधारी दल उपचुनाव को हारकर अपनी साख गवांना नहीं चाहता है, वह भी तब जबकि उसका मुकाबला प्रमुख विपक्षी दल से हो। भाजपा हर कीमत पर मल्हनी विधानसभा चुनाव जीतना चाहेगी सूत्रो की माने तो भाजपा के पास धनन्जय सिंह जैसा योग्य, जनसुलभ, अपने संघ/संगठन की विचारधारा से ओत-प्रोत बाल स्वयंसेवक विकल्प के रूप में मौजूद है। जनचर्चा है कि मल्हनी विधान सभा के उपचुनाव मे भाजपा या तो सीधे अपने उम्मीदवार के रूप में धनन्जय सिंह को चुनाव के मैदान में उतारे अथवा सहयोगी दल निषादराज पार्टी से टिकट देकर चुनाव के मैदान में उतारा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा क्योकि यहाँ मुकाबला समाजवादी पार्टी के दिवंगत विधायक पारसनाथ यादव के पुत्र से है इसलिए भावनात्मक लहर भी इस क्षेत्र में अवश्य बहेगा। यदि भाजपा अथवा उनकी सहयोगी पार्टी निषाद पार्टी धनन्जय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरती है तो चुनावी आकड़ो के हिसाब से उनके जितने का चान्स कम हो सकता है जिस कारण उसका सीधा फायदा समाजवादी पार्टी के यादव उम्मीदवार को जीत के रूप में मिल सकता है?
धनन्जय सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दायित्वधारी स्वयंसेवक राजदेव सिंह के पुत्र तथा बाल स्वयंसेवक हैं। वह भी अपने पिता राजदेव के ही भाँति संघ की एक वर्ष में एक बार होने वाली पवित्र गुरुदक्षिणा को सुचारू रूप से नियमित करते रहते हैं। कॅरोना महामारी में लॉक डाउन लगने के दूसरे दिन ही भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक परम् पूजनीय डॉ. मोहन भागवत के आवाहन पर जब तक लॉक डाउन नहीं खुला तब तक संघ द्वारा बनाए गए सूची के अनुसार भारत में अब तक किसी भी जन प्रतिनिधि द्वारा इस कॅरोना काल में की गई सहायता से कई गुनी ज्यादा सहायता (25 से 30 किलो राशन प्रति व्यक्ति) रोजाना लगभग 100 लोगों को लगातार उपलब्ध करवाया।












