मुक्ति पर्व-आत्मिक स्वतंत्रता का पर्व
ब्रह्मज्ञान को जानना ही मुक्ति नही उसे प्रतिपल जीना वास्तविक मुक्ति है
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जौनपुर, संकल्प सवेरा”ब्रह्मज्ञान को जीवन का आधार बनाकर निरंकार से जुडे़ रहना और मन में उसका प्रतिपल स्मरण करते हुए, सेवा भाव काे अपनाकर जीना ही वास्तविक भक्ति है।पुरातन संताे एवं भक्ताे का जीवन भी ब्रह्मज्ञान से जुड़कर ही सार्थक हाे पाया है।”
उक्त उद्गार मडियाहू पड़ाव संत निरंकारी सत्संग के प्रांगण में उपस्थित विशाल संत समूह को सम्बोधित करते हुए श्री श्याम लाल साहू जी (संयोजक) व पट्टीनरेंद्रपुर में संत निरंकारी सत्संग भवन के प्रांगण में उपस्थित संत समूह को सम्बोधित करते हुए श्री मनिंक चन्द्र तिवारी जोनल इंचार्ज ने व्यक्त किया व इसी क्रम में नौपेड़वा, लखमापुर, शाहगंज व जिले के अन्य ब्रांच पर मुक्ति पर्व के अवसर पर संतो ने सत्गुरु माता सुदीक्षा महाराज के संदेशों को बताते हुए कहा कि ब्रह्म ज्ञान को जानना ही मुक्ति नही है , अपितु उसे प्रतिपल जीना ही वास्तविक मुक्ति है।

उन्होंने आगे कहा कि जीवन मे आत्मिक स्वतंत्रता के महत्व को सत्गुरु माता जी ने उदाहरण सहित बताया कि जिस प्रकार शरीर में जकड़न होने पर उससे मुक्त होने की इच्छा होती है उसी प्रकार हमारी आत्मा तो जन्म जन्म से शरीर मे बंधन रूप में है और इस आत्मा की मुक्ति केवल निरंकार की जानकरी से ही संभव है। जब हमें अपने निज घर की जानकरी हो जाती है तभी हमारी आत्मा मुक्त अवस्था को प्राप्त कर लेती है। उसके उपरांत ब्रह्मज्ञान की दिव्य रोशनी में व्याप्त समस्त नकारात्मक भावो को मिटाकर भयमुक्त जीवन जीना सिखाती है तभी हमारा लोक सुखी एवं परलोक सुहेली होता है। ब्रह्मज्ञान व्दारा कर्मो के बंधनो से मुक्ति संभव है क्योंकि इससे हमें दातार की रजा में रहना आ जाता है । जीवन का हर पहलू हमारी सोच पर ही आधारित होता है जिससे उस कार्य का होना न होना हमें उदास या चिंतित करता है अतः इसकी मुक्ति भी निरंकार का आसरा लेकर ही संभव है।
संत निरंकारी मिशन व्दारा प्रतिवर्ष 15 अगस्त, अर्थात ‘स्वतंत्रता दिवस ‘ को ‘मुक्ति पर्व’ के रुप में भी मनाया जाता है। इस दिन जहां पराधीनता से मुक्त कराने वाले भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाता है वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से प्रत्येक जीव आत्मा को सत्य ज्ञान की दिव्य ज्योति से अवगत करवाने वाली दिव्य विभूतियो शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी, जगत माता बुध्दवंती जी, निरंकारी राजमाता कुलवंत कौर जी सत्गुरु माता संविदर हरदेव जी एवं अन्य भक्तो को श्रध्दा सुमन अर्पित करते हुए उनके जीवन से सभी भक्तो व्दारा प्रेेरणा प्राप्त की जाती है।












