प्रेम सद्भाव मित्रता का केंद्र जौनपुर: प्रवीण तिवारी
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संकल्प सवेरा। देश में अमन चैन शिक्षा सद्भाव प्रेम मजबूत दोस्ती की अगर बात किया जाए पल पल जनपद जौनपुर सर्वोपरि भूमिका देश में निभाता रहा है इसी सिलसिले में पत्रकार संगोष्ठी के माध्यम से जौनपुर की मूलभूत आधार एवं विकास के क्रम में जौनपुर की खासियत के बारे में समाजसेवी प्रवीण तिवारी ने कहा किजन्मभूमि ने भले ही ज़िन्दगी दी है,
मगर जीना कर्मभूमि ने सिखाया है।कहानी तो छोटे लोगों की लिखी जाती हैं,जौनपुर वालों का तो इतिहास लिखा जाता हैं।यह नगर गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है। सरकार को जौनपुर की मूलभूत आवश्यकताओं की सुधि जरूर जरूर लेनी चाहिए प्राचीन किंवदंती के अनुसार जमदग्नि ऋषि के नाम पर इस नगर का नामकरण हुआ था। जमदग्नि का एक मंदिर यहाँ आज भी स्थित है।
यह भी कहा जाता है कि इस नगर की नींव 14वीं शती में ‘जूना ख़ाँ’ ने डाली थी, जो बाद में मुहम्मद तुग़लक़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और दिल्ली का सुल्तान हुआ। जौनपुर का प्राचीन नाम ‘यवनपुर’ भी बताया जाता है। 1397 ई. में जौनपुर के सूबेदार ख़्वाजा जहान ने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ की अधीनता को ठुकराकर अपनी स्वाधीनता की घोषणा कर दी और शर्की नामक एक नए राजवंश की स्थापना की। इस वंश का यहाँ प्राय: 80 वर्षों तक राज्य रहा।जौनपुर शहर, दक्षिणी-पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य, उत्तर-मध्य भारत, वाराणसी (भूतपूर्व बनारस) के पश्चिमोत्तर में स्थित है।
जौनपुर शहर गोमती नदी के दोनों तरफ़ फैला हुआ है। जौनपुर का शाही क़िला और अटाला मस्जिद आज भी यहाँ की शोभा में चार-चाँद लगा रहे हैं। भारतीय इतिहास के मध्यकालीन भारत में जौनपुर अपनी कला एवं स्थापत्य के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। और यह शहर इत्र इमरती और और दोस्ती के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है












