विज्ञान के क्षेत्र में किया देश का नाम ऊंचा, भारत के डॉ. कृष्णा विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हुए शामिल
संकल्प सवेरा। भारत के वैज्ञानिकों को विश्व की रैंकिंग में जगह मिलना भारत के लिए गर्व की बात है | जौनपुर जिले के सिकरारा क्षेत्र के देहजुरी गाँव निवासी डॉ. कृष्णा कुमार यादव पुत्र श्री रामजीत यादव (पूर्व बड़ेबाबू श्री यादवेश इं. कॉ. नौपेड़वा) ने शोध के क्षेत्र में दोहरी उपलब्धि हासिल कर देश-विदेश तथा राज्य में जिले का नाम रोशन किया है|

मध्यांचल विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय के पर्यावरण के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्णा कुमार यादव स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार एवं एल्सेवियर वीबी द्वारा जारी विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों की सूची में लगातार दूसरे वर्ष भी बेहतरीन रैंकिंग के साथ जगह बनाई है। आपको बता दे कि इस रैंकिंग को पूरी दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है। यह सूची अक्टूबर 2023 में प्रकाशित हुई है, और यूनिवर्सिटी की ओर से हर साल वैश्विक स्तर पर कार्यों के आधार पर तथा उद्धरण मैट्रिक्स के आधार पर वैज्ञानिकों का मूल्यांकन किया जाता है। यह 1960 से 2023 के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के आधार पर गणना करता है।
इसके अलावा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से वर्ष 2022 के रिसर्च और इनोवेशन के आधार पर भी यह सूची बनायी गई है| जहाँ इस सूची में ज्यादातर वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता शामिल है वहीं डॉ. कृष्णा ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि एक युवा भारतीय वैज्ञानिक के रूप में हासिल की है। जौनपुर जिले से यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैनफोर्ड की ओर से जारी सूची में कलवारी गाँव निवासी बीएचयू के पूर्व कुलपति और डीएनए टेस्ट के जनक “पद्मश्री” प्रोफेसर लालजी सिंह का नाम मरणोपरांत सूची में शामिल किया गया है, तथा वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह का नाम भी इस सूची में शामिल है|
अभी हाल में डॉ. यादव को विश्व के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में शामिल “प्रिंसेज नौराह बिंट अब्दुलरहमान विश्वविद्यालय” रियाध, सऊदी अरब में विजिटिंग प्रोफेसर के पद पर चयनित किया गया है| जहा पर डॉ. कृष्णा को आकर्षक वेतन के साथ उच्च एवं गुणवत्ता युक्त शोध के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे रिसर्च के नए आयाम स्थापित करने तथा रिसर्च कर रहे नये शोधकर्ताओं को फेलोशिप के साथ रिसर्च में इनोवेशन कार्यों को प्रगति मिलेगी| विदित हो की डॉ. यादव “प्रिंस ऑफ सोंगकला” विश्वविद्यालय थाईलैंड में 2022 से रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में और एनवायरनमेंट एंड एटमॉस्फेरिक साइंस रिसर्च ग्रुप साइंटिफिक रिसर्च सेंटर “अल-अयन विश्वविद्यालय” इराक के साथ रिसर्च फेलो के रूप में कार्य कर रहे है, और उच्च गुणवत्ता वाले कई शोध पत्र प्रकाशित कर चुके है|
डॉ. कृष्णा यादव एक दशक से अधिक समय से पर्यावरण एवं रसायन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे अब तक बहुप्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 190 से अधिक शोध आलेख तथा 7 पुस्तक अध्याय और 5 पुस्तक प्रकाशित कर चुके हैं। उनके लेखों का वर्तमान गूगल साइटेशन 6909, एच- इंडेक्स 39, आई- 10 इंडेक्स 92 और थॉमसन रॉयटर्स इंपैक्ट फैक्टर लगभग 1000 है। जनरल ऑफ कॉर्डिनेशन केमेस्ट्री, केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल, जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज, एनवायरनमेंट इंटरनेशनल, रिसोर्स कंजर्वेशन एंड रिसाइकलिंग, रिव्यू इन एनवायरनमेंटल साइंस एंड बायो टेक्नोलॉजी, ए.सी.एस सस्टेनेबल इंजीनियरिंग एंड केमिस्ट्री, जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन इत्यादि जैसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में इनके लेख प्रकाशित हो चुके है। डॉ. यादव फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल साइंस पत्रिका के अतिथि संपादक के रूप में अपना
महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे है। इसके अलावा इन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में युवा साइंटिस्ट पुरस्कार, सर्वोच्च पर्यावरणविद पुरस्कार तथा सर्वोच्च अनुसंधानकर्ता पुरस्कार भी अपने नाम कर चुके हैं। डॉ. यादव कई जाने माने पत्रिकाओं के समीक्षक एवं अतिथि संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। हाल ही में इन्हें ए.यू.आई.क्यू कम्प्लीमेंट्री बायोलॉजिकल सिस्टम पत्रिका के मुख्य संपादक नियुक्त किया गया है।
इन्होंने कई देश जैसे साउथ कोरिया, पुर्तगाल, सऊदी अरब, मलेशिया, वियतनाम, यूके, अल्जीरिया, यूएसए और थाईलैंड के प्रोफेसर एवं वैज्ञानिकों के साथ काम कर चुके है। डॉ. यादव मुख्य रूप से जल में फ्लोराइड की समस्या और स्वास्थ्य पर प्रभाव के समाधान पर कार्य कर रहे हैं साथ ही अन्य समकालीन पर्यावरणीय मुद्दों जैसे अपशिष्ट पदार्थों से ऊर्जा का उत्पादन, सूक्ष्म प्रौद्योगिकी द्वारा जल प्रबंधन तथा खाद्य पदार्थों से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा कैडमियम , क्रोमियम, आर्सेनिक और अन्य फैक्ट्री अपशिष्ट पदार्थों के पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर भी शोध कर रहे है। यदि इन अनुसंधानों का सही प्रकार से उपयोग किया जाए तो पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है।
विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में स्थान प्राप्त करने और पी.एन.यू. सऊदी अरब में विजिटिंग प्रोफेसर के लिए उनका चयन होने एवं अनुसंधान के क्षेत्र में प्रतिवर्ष नए आयाम स्थापित करने पर पर क्षेत्र के लोगों ने बधाई व प्रसन्नता व्यक्त की है।













