स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात नायक नायिकाओं के बलिदान को जन जन तक पहुंचाया जाय : उदय सिंह
संकल्प सवेरा,जौनपुर। तिलकधारी सिंह महाविद्यालय के बलरामपुर सभागार में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी धर्मवीर ने किया ,कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ उदय सिंह ने बताया कि भारत 2022 में अपना 75 वाँ स्वाधीनता वर्ष महोत्सव के रूप में मनाने जा रहा जा रहा है ।
1498 में वास्को डी गामा के भारत आगमन के पश्चात से ही भारत के क्रांतिकारियों ने पुर्तगालियों डचों अंग्रेजों और फ्रांसीसीयों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजा दिया और इसकी शुरुआत 1741 में राजा मार्तंड वर्मा ने डचों को परास्त करके किया । 1763 – 64 में संन्यासियों ने राष्ट्र शत्रुओं से राष्ट्र की रक्षा हेतु स्वयं का सैन्यिकरण किया और अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर युद्ध किए। सिर्फ सन्यासी ही नहीं ग्रामवासी और आदिवासियों ने भी इस स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया ।
इसके उदाहरण भील आंदोलन संथाल आंदोलन मुंडा आंदोलन है । संथाल आंदोलन में लगभग 15 से 20हजार संथालों ने अपनी कुर्बानी दी । अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति जब पूरे देश में फैली थी तो जौनपुर इससे कैसे अछूता रहता।
जौनपुर के क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजा दिया । सेनापुर में इनका नेतृत्व यदुवीर सिंह छांगुर सिंह सहित अनेक क्रांतिकारियों ने किया । जबकि हौज में बाल दत्त सिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने सार्जेंट वी गुड की सेना को घेर कर मार डाला। सेनापुर और हौज में 22 और 54 क्रांतिकारियों को फांसी दी गई। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में टीडी कॉलेज के छात्रों ने दिवाकर सिंह के नेतृत्व में यूनियन जैक को उतार कर फाड़ दिया ।
दमनकारी अंग्रेजों द्वारा लाठीचार्ज और गोलीबारी की गई। जिसमें दिवाकर सिंह , ब्योमकेश तिवारी , सूबेदार अन्य सहित कई लोग घायल हुए। धनियामऊ में क्रांतिकारियों ने जमीदार सिंह के नेतृत्व में क्रांति का बिगुल बजाया जिसमें अंग्रेजों की गोलीबारी में राम निहोर कहार सहित कई लोग शहीद हुए। जिस स्वदेशी के दम पर भारत ने 1905 के बंगाल विभाजन को रद्द करा दिया वह आजादी के कई वर्षों बाद 2014 में मेक इन इंडिया के रूप में भारत स्वीकर करता है ।
जिस महापुरुष ने 562 देशी रियासतों का विलय कर के वर्तमान भारत के स्वरूप को निर्मित किया। उसको 2014 में सम्मान मिला जिन जवानों ने भारत को भारत की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है । उनके लिए राष्ट्रीय स्मारक 2019 में बनाया गया । जिस आदिवासी समूह ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया उनके नायक बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर 2021 से जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मना कर भारत उन सभी शहीदों को सम्मान दे रहा है ।
हम जिन कमियों के कारण गुलाम हुए जब हम इन कमियों को दूर कर लेंगे तो भविष्य में कभी भीकभी भी गुलाम नहीं होंगे और प्रांत के नायकों के शौर्य त्याग बलिदान से प्रेरणा लेते हुए वैभवशाली शक्तिशाली भारत का निर्माण कर पाएंगे ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मवीर मोदनवाल ने किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के प्रांतीय सदस्य रामचंद्र जगदीश अंजलि त्रिपाठी अतुल राजीव सिंह सिंह रहे कार्यक्रम का संचालन अशोक मिश्र ने किया।












