मुंगराबादशाहपुर,संकल्प सवेरा जौनपुर। स्थानीय साहित्यिक संस्था विजय संस्थान के तत्वावधान में गुरुवार की रात सार्वजनिक इंटर कॉलेज मुंगराबादशाहपुर के प्रांगण में विराट कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन एस आई कालेज के संस्थापक स्व 0 विजय बहादुर सिंह एवम् विजय संस्थान के संस्थापक स्व 0 भूपेंद्र सिंह के संयुक्त पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया। जिसमें देश के अनेक प्रांतों से आए कवियों ने अपनी उच्च स्तरीय रचनाओं से पूरी रात श्रोताओं को बांधे रखा । सूर्योदय के साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह रहे। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवियित्री एकता भारती की सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात रीवा से पधारे हास्य व्यंग्य कवि अमित शुक्ल ने अपनी स्तरीय रचनाओं को प्रस्तुत किया। इसके पश्चात विहार से पधारे शंकर कैमूरी ने अपने भोजपुरी भाषा में काव्य पाठ को कुछ इस अंदाज में बांचा- “काहे सुसुकत धनिया पलानी में करधनिया हेराई गइली पानी में, डाड होई गईला नदी में गईली। डांड जे मगिहै तो का हम देबै, दिहे रहे जीजा जी हमका निसानी में।।
इसके बाद कैमुरी ने अपनी दूसरी रचना कुछ यू बांची – “ ईमान धरम का दौर चले हिंदू भी पिएं मुस्लिम भी पिएं। पीने का मजा तब आएगा जम जम भी रहे गंगा भी रहे।।” इसके पश्चात प्रतापगढ़ से पधारे डॉ राजेंद्र राज ने हास्य व्यग्य की कविता लोगो को सुनकर खूब वाह वाही बटोरी उन्होंने अपनी स्तरीय रचनाओं को कुछ यूं पढ़ा – ” कोरोना की है मजबूरी अबकी होली रही अधूरी, दो गज दूरी मास्क जरूरी”। तत्पशचात् निदेशक आकाशवाणी प्रयागराज लोकेश शुक्ल ने अपनी रचना लोगो को सुना के भाव विभोर कर दिया।उन्होंने कुछ इस अंदाज में अपने गीत प्रस्तुत किए -” मजा तो तब है मेरे यार अबकी बार होली में। अगर हो जाय सस्ता देश का बाज़ार अबकी बार होली में।।” इसके बाद वाराणसी से पधारे झगडू भइया ने अपनी रचना कुछ यू पढ़ी – ” हम भरी सदस्य का परचा, बाबू भरई प्रधानी का”। तत्पश्चात् प्रतापगढ से पधारे डा0 नागेंद्र अनुज ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में पढ़ी – ” जीयरा सासत में परा अहई घर घर का इहै कहानी बा।
बड़कवा बगिया बेचत बा छोटकवऊ किए तैयारी बा।।” उसके पश्चात इटावा से पधारे मनोज सिंह चौहान ने अपनी ये रचना बाँची – ” जुल्म मां भारती पर हो कभी चुप रह नही सकता।” तत्पश्चात् बाराबंकी से पधारे प्रमोद पंकज ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में पेश किया – “ कोरोना कोरोना आना नही मेरे देश में। बाई पास होके पाकिस्तान चले जाना।।” तत्पश्चात् दूसरी रचना – मेरी बिटिया गई थी स्कूल गली में भूखे भेड़िए मिले। इज्जत की उड़ा दी धूल गली में भूखे भेड़िए मिले।।” इसके बाद पीलीभीत से आई कवियित्री एकता भारती ने अपनी काव्य रचना कुछ यू सुनाई – ” संसार को संसार बनाती हैं बेटियां। कुदरत की नेमत में बहुत खास है बेटियां।।” इसके बाद सुल्तानपुर से आई फलक सुल्तानपुरी ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज़ में बंया किया – ” तुम क्या मिले कि मेरा मुकद्दर निखर गया। उजड़े हुए नसीब का गुलशन निखर गया।” के तुरंत बाद मंच का संचालन कर रहे प्रयागराज से पधारे अशोक बेशरम ने अपनी रचना यू पढ़ी –
” मनइन में रहे मेल तो समझो बसंत है। पेड़ो से झरई पात तो समझो बसंत है।।” क्षेत्र के हस्ताक्षर कवि चन्द्र बहादुर सिंह चन्द्र ने स्व0 विजय बहादुर सिंह के जीवन पर आधारित अपनी खास रचना पेश कर खूब वाहवाही बटोरी।कार्यक्रम के पूर्व संस्थान के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने आए हुए कवियों का मल्यार्पण के साथ ही शाल भेंट कर सम्मानित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कवि राजेंद्र राज़ ने किया। अंत में विजय संस्थान के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह फंटू ने आए हुए कवियों के साथ ही उपस्थित गणमान्य जनों, श्रोताओं के प्रति आभार ज्ञापित किया। कवि सम्मेलन में विषेश रूप से सार्वजानिक इन्टर कलेज के प्रधानाचार्य विनोद कुमार सिंह, संस्थान के संरक्षक जितेंद्र बहादुर सिंह, नगर पालिका के चेयरमैन शिव गोविंद साहू, पं 0 कमला शंकर मिश्र , विमल सिंह, सुनील सिंह, हंसराज सिंह, राहुल सिंह,दिनेश गुप्त, सर्वजीत सिंह, अनुपम तिवारी, सुरेंद्र बहादुर सिंह, सुरेश सिंह, रामबाबू तिवारी, पवन सिंह, निरूप त्रिपाठी, नवल सिंह, सुनील कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।












