मैं एक एक घर आऊंगा, रविवार को आप सब अपने अपने गांव में जरूर निकले।
प्रिय, भाइयो ,बहनों, माताओं एवं दोस्तो।
मैं धनन्जय सिंह एक साधारण से गांव बन्सफा के एक साधारण से परिवार का लड़का हूं।बचपन मे मेरी शिक्षा बाहर से हुई फिर भी गांव से मेरा लगाव बना रहा, मैं अपने गांव और दोस्तो के साथ क्रिकेट प्रेम के कारण कलकत्ता से भाग आता था।
इंटर की पढ़ाई मेरी टी डी,कालेज से हुई फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से।मैंने अपने बचपन से लेकर राजनीति में आने तक अपने लोगो के बीच मे रहा हूँ, ऐसा कोई घर नही होगा जिस घर में मैं नही गया हूं।ना जाने कितनों घरों में मैंने घुस के खाना खाया होगा मुझे भी नही याद होगा।
ऐसा कोई घर नही होगा जहा से मुझे बेटे का प्यार ना मिला हो,2002 के पहले चुनाव में जिस प्रकार प्यार और आशीर्वाद मुझे मिला था बिरले लोगो को पूरे भारत मे मिला होगा, आज भी आप सब मुझे अपना बेटा और भाई ही मानते हैं मुझे पता है।
मेरे सुख में सुखी और मेरे दुख में मुझसे जादा आप लोग दुखी रहते हैं ये मुझे हमेशा एहसास रहता है।
इधर मेरी परेशानियों और राजनैतिक रुकावट के कारण हमारे क्षेत्र का वह विकास नही हो पाया जितना होना चाहिए था।
आज उपचुनाव आ गया है, मैं फिर से आप लोगों के आशीर्वाद के लिये आप के सामने खड़ा हूं, निश्चय आप को करना है कि आप क्या करते हैं, आशीर्वाद दे या ना दे मैं आप लोगों को छोड़ के जाने वाला नही हूं।
आप लोग भी जान लीजिए, आप को विधायक मिल सकता है लेकिन बेटा नही मिलेगा।
धनन्जय आप सब का बेटा और भाई है और आप सब मेरे परिवार।
इसी रविवार को सुबह8 बजे से मैं एक साथ पूरे मल्हनी विधानसभा में हर बूथ पर प्रचार शुरू करूँगा, मेरा सभी युवा भाइयो और साथियों से अपील है कि मेरे लिए आप सब घर से बाहर आ जाइये, बस अपने बूथ को संभाल लीजिये।
पिता तुल्य बड़े बुजुर्ग, माताओं, एवं बहनों से निवेदन है कि घर के द्वार पर खड़े होकर मेरी टीम को आशीर्वाद दे और अपना प्यार मुझे प्रेषित करें।
मैं एक एक घर आऊंगा, रविवार को आप सब अपने अपने गांव में जरूर निकले।
आप का अपना
— धनन्जय—












