रिपोर्ट: ख़ुर्शीद अनवर खान
संकल्प सवेरा,जौनपुर :वतन की माटी से मोहब्बत हो तो दूरियां बेड़ियां नहीं बनतीं। दिल में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हो तो पद का होना न होना मायने नहीं रखता।वह शख्स न किसी पद पर है न ही जनप्रतिनिधि।
लेकिन जन के प्रति ज़िम्मेदारी ऐसे निभाई की जन जन के दिल जगह बना ली। डेढ़ हजार किलोमीटर दूर रहके भी उस एक शख्श ने वतन वासियों का ऐसे ख़्याल रखा जिसे दशकों तक भुलाया नहीं जा सकता।गांव में टिमटिमा रहे शिक्षा के दीप को मशाल बनाया, बीमार पड़े हॉस्पिटल का कायाकल्प किया।
भूखों तक राशन और रोटी पहुंचाई। धर्म की ध्वजा को बुलन्द किया और इंसानियत की नज़ीर पेश की।हम बात कर रहे हैं मुम्बई के बड़े बिज़नेसमैन ज्ञान प्रकाश सिंह की।
कौन हैं ज्ञान प्रकाश सिंह
ज्ञान प्रकाश सिंह जौनपुर ज़िले के गोधना गांव के मूल निवासी हैं और फ़िलवक्त मायानगरी मुम्बई के बड़े कारोबारी हैं।अमूमन मुंबइया सेठ वतन को भूल कर परदेस को ही अपनी दुनिया समझ लेते हैं।लेकिन ज्ञान प्रकाश सिंह सिक्कों की खनक के आगे माटी की महक न भूल सके।तक़रीबन 4 साल पहले ज्ञान प्रकाश तब प्रकाश में आये जब उन्होंने अपने गांव गोधना के प्राथमिक एंव पूर्व माध्यमिक विद्यालय की सूरत बदल दी।बड़े महानगर की तर्ज़ पर विद्यालय का ऐसा कायाकल्प किया किया कि लोग हैरत में पड़ गए।यहां न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस क्लासेज़ हैं, बल्कि कम्प्यूटर से लेकर विज्ञान तक कि शिक्षा की शानदार व्यवस्था है।उन्होंने टीडी कॉलेज में केमेस्ट्री प्रयोगशाला का निर्माण कराया और उसे तकनीकी सुविधाओं से लैस भी किया।मेधावी छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए माँ दुर्गा विद्यालय के 50 छत्रों को मुफ्त में साइकिल दी।
धर्म की ध्वजा को बुलंद किया
अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थान मंदिर के निर्माण के लिए ज्ञान प्रकाश सिंह ने एक करोड़ , 21 लाख, 11 हजार 101 रुपये का दान दिया।जौनपुर के गोपी घाट पर खण्डहर के रूप में तब्दील हो चुके गोमतेश्वर महादेव मंदिर और हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया और ज़िले के कई धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं को आर्थिक सहयोग दिया।
कोविड काल मे बने मसीहा
कोरोना के साथ आये लॉक डाउन ने जब लाखों लोगों के सामने रोटी तक कि समस्या खड़ी कर दी तब ज्ञान प्रकाश सिंह हज़ारों घरों का सहारा बन गए। पूरे तीन महीने उन्होंने सामुदायिक किचन चलवाया।उनकी टीम ने प्रतिदिन हजारों लोगों तक रोटी और राशन पहुंचाया।इतना ही नही मरीजों को दवा और बच्चों के दूध का भी इंतेज़ाम किया।जब ऑक्सीजन के लिए हर तरफ़ हाहाकार मचा था तब उन्होंने ज़िला अस्पताल में 5 ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर उपलब्ध करवाया और दो वेंटिलेटर देकर कई इंसानों को बे मौत मरने से बचाया।प्रधानमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये की राहत राशि दी .
बदल दी लीलावती अस्पताल की सेहत
बीते वर्ष मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने जनप्रतिनिधियों से अस्पतालों को गोद लेकर उनकी दशा सुधारने का आह्वाहन किया।कई विधायकों ने सरकारी अस्पतालों को गोद लेने का नाटक किया, फोटो खिंचवाए, मीडिया की सुर्खियां बने लेकिन अस्पतालों की दशा जस की तस रह गयी।
सीएम की एक आवाज़ पर जनप्रतिनिधि न होते हुए भी राजकीय अस्पताल लीलावती को गोद लिया ज्ञान प्रकाश सिंह ने।पहले भवन की मरम्मत करवाई, रंग रोगन करवा कर उसकी तस्वीर ही नहीं बेड, दवाओं और ज़रूरी उपकरणों का इंतेज़ाम कर तकदीर भी बदल दी।अब यह सरकारी अस्पताल भव्य निजी अस्पतालों को टक्कर दे रहा है।उन्होंने ज़िले में एक मोबाइल मेडिकल सर्विस की शुरुआत भी की है।इस सचल चिकित्सा सेवा में एम्बुलेंस, डाक्टर, नर्स और दवा सबका इंतेज़ाम किया गया है।
बदबूदार शौचालय बन गया डीलक्स
जौनपुर सदर अस्पताल का शौचालय खण्डहर में बदल चुका था।यूँ समझिए कि नाम मात्र का ही शौचालय था।कई वर्षों से लोग जनप्रतिनिधियों और ज़िम्मेदार अफ़सरों को चिट्ठियां लिख रहे थे।सदर अस्पताल आने वाले हजारों लोगों की इस तकलीफ की ख़बर ज्ञान प्रकाश सिंह तक पहुंची।उन्होंने निजी पैसे से यहां शानदार डीलक्स शौचालय का निर्माण करवा दिया।जिसका उदघाटन 2018 में तत्कालीन काबीना मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने किया
बरक़रार रखी तिरंगे की शान
राष्ट्रवाद के नारों के बीच शहर के लोहिया पार्क का तिरंगा फट गया।लाखों की कीमत का झण्डा अब कौन लगवाए।तमाम जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंचाई गई।लेकिन खुद की लाखों रुपये की होर्डिंग लगवाने वाले नेताओं के कान पर जूं तक न रेंगी।खबर ज्ञान प्रकाश सिंह तक पहुंची।उन्होंने मुम्बई से तिरंगा भेजा जो आज भी पूरी शान से लोहिया पार्क में लहरा रहा है।शायद ज्ञान प्रकाश सिंह जैसों के लिए ही किसी शायर ने लिखा है .., वतन की खाक मुझे एड़ियां रगड़ने दे, मुझे यकीन है पानी यहीं से निकलेगा ।


















