जुड़वा बच्चियों को दे नया जीवन, “आशा” गीतादेवी ने जीता परिजनों का मन
पेशे के प्रति समर्पण
आशा की लगातार देखभाल व सलाह से बच्चियों का बढ़ा वजन
संकल्प सवेरा,जौनपुर। मछलीशहर ब्लॉक के गांव देवरिया के रवींद्र यादव के परिवार का आशा कार्यकर्ता गीता देवी ने दिल जीत लिया है। भला ऐसा हो भी क्यों न, दो वर्ष पहले जब उन्हें जुड़वा बेटियां ईशा और इंद्रेशा पैदा हुईं तब आशा गीतादेवी ने उनकी बच्चियों बड़ा ख्याल रखा था। जन्म से कमजोर इन बच्चियों का हर सप्ताह वह वजन करने आती थीं।
उनकी सलाह से ही बच्चों से जुड़ी जगहों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। गीता देवी समझाती थीं की दाल पियो, मालिश कराओ, जो भी मिले खाओ-पियो जिससे बच्चों का वजन बढ़े। दो वर्ष तक उनके लगातार ख्याल रखने का नतीजा है की आज दोनों बच्चियां स्वस्थ हैं। आशा कार्यकर्ता गीता देवी अब भी हमेशा आती रहतीं हैं और बच्चों का ख्याल रखतीं हैं।

रीना के गर्भावस्था के दौरान गांव की आशा कार्यकर्ता गीतादेवी ने उनके परिवार को बार-बार सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने की सलाह दी थी लेकिन वे लोग नहीं माने। मछलीशहर के ब्लॉक मोबलाइजेशन कोआर्डिनेटर (बीएमसी) भानु प्रताप सिंह ने जब आशा से इस बारे में जानकारी ली तो पता चला कि बच्चियों के पिता की एक प्राइवेट हॉस्पिटल के बगल में चाय की दुकान है और हॉस्पिटल के डॉक्टरों से अच्छा परिचय है।
इसलिए उन्होंने वहां पर डिलीवरी करवाई। वहीं पर 06 नवम्बर 2019 को रीना को दो जुड़वा बच्चियां पैदा हुईं। बच्चियों के घर पहुंचने पर आशा कार्यकर्ता गीतादेवी उनके घर गईं। पहले साबुन से हाथ धुला और हाथ धूप में सुखवाकर बच्चों का वजन किया। थर्मामीटर से बुखार नापा। उन्होंने मां को छह महीने तक बच्चों को सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह दी। बताया कि छह महीने बाद उन्हें ऊपरी आहार देना है। बच्चे को कंगारू मां की तरह हमेशा सीने से चिपका कर रखना है या गर्म कंबल में लिपटाकर रखना है।
वजन करने पर दोनों बच्चियों का वजन बहुत कम दिखा। एक का 1600 ग्राम तथा दूसरी का 1500 ग्राम था। 1600 ग्राम वजन वाली बच्ची का नाम ईशा और 1500 ग्राम वजन वाली बच्ची का नाम इन्द्रेशा है। कम वजन होने पर उन्हें जौनपुर सदर हस्पिटल रेफर करवाने के लिए समझाया। बताया कि वहां मुफ्त इलाज होगा लेकिन परिवारवाले नहीं माने तो वह उनके घर बार-बार भ्रमण करने गईं। नाल पर कुछ न लगाने की सलाह दी। इस तरह से बच्चियों के 42 दिन का हो जाने तक आशा उनके घर की सात विजिट कर चुकीं थीं।
हर विजिट पर बच्चों की देखभाल करने के बारे में समझाती रहीं। इससे पहले सप्ताह बाद से ही बच्चियों का वजन तेजी से बढ़ने लगा। पैदा होने के 42वें दिन तक ईशा का 2200 ग्राम और इन्द्रेशा का वजन 2000 ग्राम हो गया। छह मार्च 2020 तक उन्हें आशा बीसीजी, पेेंटा-2 का टीका लगवा चुकी थीं। इस समय बच्चियां दो साल की हो चुकी हैं। और स्वस्थ हैं। उनका वजन अच्छा है। उनमें बाल सुलभ चंचलता है और हर समय खेलती कूदती रहतीं हैं जिसके लिए मां रीना आशा कार्यकर्ता रीना की शुक्रगुज़ार हैं।
तत्कालीन प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) डॉ राजेंद्र विश्वकर्मा बताते हैं कि कम वजन के इन बच्चों की देखरेख के लिए आशा कार्यकर्ता गीतादेवी बराबर उनके सम्पर्क में रहीं। उन्हें बच्चों को मां के सीने से चिपका कर रखने (कंगारू मदर केयर) की सलाह दी गई। बच्चों को किसी अन्य के सम्पर्क में आने से रोका गया। गर्म कमरे में रखने को कहा गया जिससे बच्चों तापमान गिरने न पाए।
डेढ़ से दो घंटे पर दो-दो चम्मच मां का दूध निकलवाकर देने को कहा गया। बच्चों का वजन बढ़ने में डाइट की बड़ी भूमिका होती है जिसके बारे में आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण मिला होता है। इन सावधानियों का आशा कार्यकर्ता मौके पर जाकर निरीक्षण करतीं हैं। उन्हें जहां भी बच्चों के प्रतिकूल लगता है, उसे सही करातीं हैं।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ आरसीएच) डॉ सत्य नारायण हरिश्चंद्र कहते हैं कि वजन कम होने पर आशा को पोषण पुनर्वास केंंद्र ले जाना चाहिए था लेकिन तब बच्ची के माता-पिता नहीं तैयार हुए। उसकी सूचना अपने प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) को दी और उनके बताने के अनुसार देखभाल की जिससे बच्चों का वजन सही हुआ।












