फोटोस्टेटकांड
थानेदार का भी हो गया स्थानांतरण,विधायक की हनक रही बरकरार
मामला फोटो स्टेट के 40 रुपए को लेकर दुकानदार के घर पर तांडव मचाने और एफ आई आर भी दर्ज कराने का
जौनपुर-पहली बार ऐसा वाकया सामने आया है कि पुलिस कर्मी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से से पुलिसकर्मी ही पलट गए और दुकानदार तथा उसके परिवार वालों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगाते हुए रिपोर्ट कोर्ट भेज दिया।लाइन बाजार थानाध्यक्ष का भी स्थानांतरण हो गया।विधायक का हस्तक्षेप व उनकी हनक बरकरार रही।व्यापार मंडल व कुछ नेताओ ने भी दुकानदार के समर्थन में पुलिस के आला अधिकारियों से कार्यवाही की मांग किया था। पुलिस की इस मामले में काफी किरकिरी हुई।
बता दे कि 6 जून 2020 को 6:30 बजे शाम विनोद सिंह की फोटोस्टेट की दुकान पर लाइनबाजार का सिपाही रामाश्रय आया।फोटोस्टेट कराने के 40रु० की बात को लेकर गालियां दिया तथा कई थप्पड़ जड़ दिए।थोड़ी देर बाद थानाध्यक्ष लाइन बाजार चौकी इंचार्ज मियांपुर व अन्य पुलिसकर्मी कई गाड़ियों से उसकी दुकान पर चढ़ आए। दरवाजा तोड़ते हुए घर में घुसकर उसके लड़कों तथा दिव्यांग भतीजे व गर्भवती भतीजी को मारा पीटा लड़कों को थाने उठा ले गए।गर्भवती भतीजी को अंदरूनी चोट लगने से वह लहूलुहान हो गई।विधायक के हस्तक्षेप पर छोड़े।पुलिस अधीक्षक ने सिपाही रामाश्रय को दोषी पाते हुए निलंबित किया लेकिन थानाध्यक्ष को यह नागवार गुजरा।उन्होंने उसी पुलिसकर्मी से लोकसेवक पर हमला,धमकी,मारपीट,बलवा व गाली-गलौज की धाराओं में विनोद व उसके परिवार वालों पर एफआईआर दर्ज करा दिया।जिस पर विनोद ने मुख्यमंत्री,डीजीपी, मानवाधिकार आयोग,डीएम व एसपी को रजिस्ट्री व फैक्स कर थानाध्यक्ष सिपाही चौकी इंचार्ज समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग किया।थानाध्यक्ष का स्थानांतरण हो गया।विवेचक ने वादी पुलिसकर्मी रामाश्रय, रामायण यादव,दिवाकर राय तथा साक्षी पवन कुमार,गौरव साहू,कृष्ण कुमार,सत्येंद्र बहादुर सिंह व सुधीर यादव के बयान,निरीक्षण घटनास्थल व अन्य संकलित साक्ष्य व गहन छानबीन से पाया कि विनोद सिंह व उनके परिवार के खिलाफ जुर्म साबित नहीं हुआ इसलिए विवेचक ने साक्ष्य के अभाव में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में भेज दिया।












