यह मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं, इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है – विपिन जैन
रिपोर्ट विवेक चौबे
सूरत,संकल्प सवेरा। हम जब भी स्वयं के बारे में सोचते हैं, लगता है कि हमारे अलावा कोई भी इस दुनिया में पीड़ित है ही नहीं, भगवान ने सिर्फ हमारे ऊपर ही दुखों का पहाड़ रखा हुआ है। यदि आप ऐसा सोचते हैं, तो निश्चित तौर पर गलत सोचते हैं। भगवान को कोंसने और एक बार स्वयं से बाहर आकर अपने आसपास देखने की कोशिश करें, आप पाएंगे कि आपसे अधिक गमों के बोझ तले, बिना अपने दुखों को अपने पर हावी करने के चलते कई लोग अपना जीवनयापन कर रहे हैं। ऐसा ही एक जिंदादिल उदाहरण आज हम आपके सामने पेश करने जा रहे हैं। चलिए लेकर चलते हैं आपको एक पोलियो से पीड़ित से लेकर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने तक के सफर पर।
गुजरात के दाहोद जिले के एक छोटे-से गाँव लिमडी में वर्ष 1975 में जन्मे विपिन जैन का बचपन महज 8 माह की उम्र में ही तहस-नहस हो गया, जब घरवालों को पता चला कि विपिन की कमर के नीचे का भाग पोलियो का शिकार हो चुका है। बावजूद इसके विपिन ने कभी-भी अपनी कमी को अपने पर हावी नहीं होने दिया। अपने बचपन का बहुत बड़ा हिस्सा विपिन ने जमीन पर हाथों के सहारे रेंगकर बिताया, वह भी बिना किसी शिकन के। 12 वर्ष की उम्र में लॉयंस क्लब द्वारा प्राप्त ट्राइसिकल ने मानो विपिन को उड़ने के लिए पंख दे दिए हों। इसके बाद विपिन कभी नहीं रुके और लगभग 20 वर्ष की उम्र यानि 1994 में उनकी पहली सफल सर्जरी हुई। कहते हैं न, अपनों का साथ, और सर पर हाथ हो, तो कितना भी बड़ा तूफान ही क्यों न हो, धूल-सा लगता है। सभी के समर्थन से विपिन ने अपना ग्रेजुएशन पूरा किया और इंदौर आकर सीए की आर्टिकलशिप पूरी की। 9 सर्जरीज के बाद विपिन कैलिपर्स और क्रंचेस की सहायता से केवल खड़े होने के ही नहीं, बल्कि चलने के भी काबिल बनें और अपने लगभग सभी काम स्वयं करने लगे।
जिंदगी जीने का हुनर रखने वाले और जिंदादिली के धनी विपिन कहते हैं, “मेरी विकलांगता को मैंने कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। अपनी विषमता को ही क्षमता बनाकर मोडिफाइड कार चलाने के साथ ही पिछले 15 वर्षों में मैंने सम्पूर्ण विश्व में कई देशों की यात्रा की है। यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, यूएई, सिंगापुर देखने के साथ ही मैंने बाली, दुबई, थाईलैंड और अमेरिका में कई एडवेंचर्स में हिस्सा लिया है। अपनी विकलांगता को दौड़ में हराकर कई मीटर पीछे छोड़कर मैं आज एक सार्थक सीए हूँ और अपनी मल्टीलोकेशन फर्म में 40+ टीम का हैड हूँ। साथ ही मैं जयपुर स्थित एनजीओ, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के इंदौर सेंटर में ऑनररी ऑडिटर और एडवाइजर हूँ।
यह संस्था जरूरतमंदों को कैलिपर्स और जयपुरी फुट प्रदान करती है। मैं इंदौर स्थित जैन सेवा समिति एनजीओ में भी ऑनररी ऑडिटर और एडवाइजर हूँ। यह संस्था बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को चिकित्सा, शिक्षा तथा अन्य सुविधाएं प्रदान करती है। इन संस्थाओं से प्रभावित होकर, गरीबों की सहायता के उद्देश्य से मैंने भी अपने दादाजी के नाम पर अपनी एक संस्था की शुरुआत की है। यह संस्था पूर्ण रूप से गरीब और लाचार लोगों की सहायता को समर्पित है।”
जीत चुके हैं कई अवॉर्ड्स
अपनी जिंदगी खुलकर जीने का जीवंत उदाहरण बने विपिन किसी भी क्षेत्र में कमतर नहीं हैं। वे कई अवॉर्ड्स अपने नाम कर चुके हैं, जैसे- वर्ष 2014-15 में लॉयंस क्लब लिमडी द्वारा स्पेशल पर्सनालिटी के लिए अवॉर्ड, वर्ष 2019 में अहमदाबाद स्थित गुजराती यूनिवर्सिटी तथा कलगी फाउंडेशन द्वारा दिव्यांगरत्न अवॉर्ड और वर्ष 2020 में उम्मीद फाउंडेशन द्वारा स्पेशल अवॉर्ड जीत चुके हैं। इसके साथ ही अनेकों उपलब्धियों के धनी विपिन एक मल्टीलोकेशन सीए फर्म मेसर्स मनोज विपिन एंड कंपनी के फाउंडर पार्टनर हैं। यह फर्म मुंबई, वड़ोदरा, अहमदाबाद, लिमडी (गुजरात), इंदौर और अमेरिका में 15 प्रोफेशनल्स तथा 40+ टीम से फलीभूत है। इतना ही नहीं, विपिन अपने साथ दशकों से जुड़े हुए एम्प्लॉयीज के लिए फॉरेन ट्रिप्स ऑर्गेनाइज करते रहते हैं। इसके साथ ही वे चार्टर्ड अकाउंट्स ऑफ इंडिया के इंस्टीट्यूट के विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स में मोटिवेशनल तथा इंस्पिरेशनल स्पीकर रह चुके हैं।













