दीपावली मिलावटी मिठाइयां कहीं रंग में भंग न कर दें?
संकल्प सवेरा, जौनपुर। त्योहार कोई भी हो, मीठा न हो तो सब फीका रह जाता है। मगर इस मीठे की जगह जहर हो तो कल्पना कीजिए, क्या होगा? सब रंग-भंग हो जाएगा। इस दीपावली में कहीं ऐसा न हो कि आप जिन्हें उपहार मैं मिठाई दे रहे हैं, उनमें कुछ जहर जैसा तो नहीं?

जरा सोचिए, आखिर हम उनका मुंह मीठा करा रहे हैं, या फीका। जी हां, हम अपने शहर की मिठाइयों की हो बात कर रहे हैं। दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश भर से ऐसी मिठाइयों की शिकायतें मिलती रहती हैं। इसलिए यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि त्यौहारों में नकली मिठाइयों की भरमार रहती है। हमें इनसे हमेशा सतर्कता बरतनी चाहिए। हम इन मिठाइयों से कैसे बचें, इनकी शुद्धता कैसे सुनिश्चित हो, इस पर सजगता दिखाने की जरूरत है। नकली खोवा मावे की मिठाई की बात आपने खूब सुनी होगी।

प्रशासन ने भी मिलावटी मिठाइयों की खूब घर-पकड़ की है। कई मामले दर्ज हुए। कोर्ट में सुनवाई हुई। कुछ सजा भी हुई हैं, लेकिन ऐसी कोई सजा अब तक नजीर नहीं बन सकी जो मिलावटखोरों के दिलों में खौफ पैदा कर सके। खेदजनक है कि हम लोग ऐसे मिलावटों के प्रति बिल्कुल बेखबर हैं, उदासीन हैं। मूकदर्शक बनकर हम इनके शिकार हार्ट, शुगर या बीपी वाले मरीजों के लिए तो यह बहुत ही जा चुके हैं, और बनते जा रहे हैं। याद रहे कि नकली या मिलावटी खाद्य पदार्थ खतरनाक है। साधारण समझ की बात यह है कि इस समय बेचने पर सख्त सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 माह से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। पीएफए अधिनियम की धारा 7/16 के मुताबिक मिलावट करने पर अधिकतम 3 साल की सजा होती है। धारा 57 के तहत तो 10 लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। दिल्ली-एनसीआर में रोजाना आने वाली हजारों टन खोवे और मेवे की खेप से सहज हो अनुमान लगाया जा सकता है कि इसके लिए आखिर, दूध की उपलब्धता कैसे संभव हो पाती है? होली, दशहरा, दीपावली और छठ के समय गली-गली में दूध से तैयार मिठाइयां बिकती हैं। खरीददार इन्हें शौक से खरीद कर त्यौहार सेलिब्रेट करते हैं परंतु उन्हें नहीं पता होता कि सेलिब्रेशन के मीठेपन में कौन सा हानिकारक तत्व उनके जीवन को धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है।

आखिर इतना दूध कहाँ से आता है? दूध की खपत तब और बढ़ जाती है, जब त्योहारों का सीजन आता है। जरा सोचिए दूध की आपूर्ति इसके बावजूद कम नहीं होती।
दूध समाज के हर वर्ग की जरूरत है लेकिन मिलावटखोर हमें कृत्रिम दूध पिलाकर तरह-तरह की बीमारियों के घेरे में ला देता है। यूरिया, डिटजेट, शैंपू, चीनी और सोडियम वाई कार्बोनेट के प्रयोग से जहां दूध जहरीला बनता है वहीं डेयरी मालिकों द्वारा पशुओं को प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर निकाला गया दूध हमें बीमार करता चला जाता है। इसलिये आप खूब समझ कर ही जान पहचान के दुकानदारों से ही मिठाइया खरीदे।
Happy Dipawali 2023













