डॉक्टर श्रीपाल सिंह क्षेम की मनाई गई पुण्यतिथि
मुझे एक बार फिर सरहद से मेरी मां बुलाती है
संकल्प सवेरा,जौनपुर। साहित्य वाचस्पति डा. श्रीपाल सिंह क्षेम की तेरहवीं पुण्यतिथि पर भव्य कवि सम्मेलन एंव मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री सुदामा सौरभ ने चरनन में मन लागा हमार माई वाणी वंदना से किया। इसके बाद शायर अंसार जौनपुरी ने-यहां पर मत बांटो त्रिशूल यहां पर मत बांटों तलवार। राम की धरती पर रावण की नहीं चलेगी यार।। जैसी कविताओं से राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। कवयित्री विभा तिवारी ने-इसलिए हां कहा मुझको, उसका चेहरा नहीं उतर जाये। जैसी गजल सुनाकर श्रृंगार रस की छटा बिखेरी।
एक पल ही जिओ फूल बनकर जियो शूल बनकर ठहरना नहीं जिन्दगी एक पल ही जिओ, गीत बनकर जिओ, अश्रु बनकर निखारना नहीं जिन्दगी।
जैसी अनेक कविताएँ साहित्य वाचस्पति डा० श्रीपाल सिंह द्वारा रचित है जो आज देश ही नहीं’ विदेशों में भी जौनपुर जनपद की मिट्टी की सुगन्ध बिखेर रहीं हैं। इनके द्वारा प्रणीत कृष्ण द्वैपायन’ महाकाव्य हिन्दी साहित्य में गौरवपूर्ण स्थान रखाता है। समीक्षा के क्षेल में भी ‘द्वायाबाद की काव्यः साधना’ और ‘छायाबाद के गौरख चिद्ध की सपना का लेखन करके ‘गद्य साहित्य’ में भी डा० क्षेम का योगदान उल्लेखनीय है।
क्षेम जी ने न केवल साहित्य की सर्जना की अपितु साहित्य के सेल में नयी पीढ़ी तैयार किया ताकि जनपद में साहित्य की लौ बुझने न पाये। यहाँ’ की गंगा-जमुनी तहजीब विकास को ध्यान बचाये रखने हेतु उन्होंने हिन्दी कवियों के साथ उर्दू अदब के सहि स्वनाकारों-शायरी को भी
स्थापित काले का कार्य किया।
। संचालक सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने डा. क्षेम के व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने चूड़ी खनकायी तेरा बायां हाथ टूट गया। लगने लगा कि अब दाहिने के बारी है के माध्यम से पाकिस्तान को चेतावनी दी। ओज के कवि डा. रणजीत सिंह ने-वतन किस हाल में होगा यही चिंता सताती है। मुझे इक बार फिर सरहद से मेरी मां बुलाती है जैसी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं में राष्ट्रीय चेतना प्रवाहित की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पं. रामदयाल द्विवेदी ने डा. क्षेम की कविताएं सुनाकर उन्हे श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. रामकृष्ण त्रिपाठी तथा आभार ज्ञापन बेहोश जौनपुरी ने किया। उक्त अवसर पर धात्री तिवारी, अंकुश कुमार, फूलचन्द्र भारती, दयाशंकर सिंह, देवी सिंह आदि उपस्थित रहे।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा कार्यक्रम के आयोजन के लिए पंडित रामकृष्ण त्रिपाठी एवं विकलांग पुनर्वास केन्द्र में आये कवियों-शायरों के सभी सदस्यों,ने कवि सम्मेलन प्रति धन्यवाद दिया।












