जन्म_दिन_विशेष
पूर्व_सांसद_धनंजय_सिंह जी आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाए।
संकल्प सवेरा। आज बात करेगे एक ऐसे नेता की जिन्होंने अपने शर्तों पर राजनीतिक ऊचाइयों को छुआ । बात होगी ऐसे नेता की जिनके लिए कोई पद उनके राष्ट्र प्रेम से ज्यादा मायने नही रखता ।

अपने राजनीतिक विचारों के लिए राजनैतिक दलों से लड़ा । जेल जाना स्वीकार किया पर झुकना बर्दास्त नही किया । आज बात करेगे ऐसे निडर निर्भीक और बेवाक नेता की जिससे माफिया डरते हैं । भ्रष्टाचार के आकंठ डूबे अधिकारी से लेकर फैशन बाज नेता डरते हैं । वजह है तो सिर्फ अपनी सम्मानित जनता के पूरी तरह ईमानदार होना ।
हम ऐसे नेता की बात कर रहे हैं । जिसने कभी गलत का साथ नही दिया । राजनीति को विचारों की नोक पर रखकर स्पष्ट नीति से राज किया । जी हम बात कर रहे है पूर्वांचल के लोकप्रिय नेता पूर्व सांसद धनंजय सिंह की ।
ये उपज है पहले टी डी कालेज बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति की । स्यवं छात्र संघ चुनाव तो नही लडे । लेकिन अपने मित्र स्वर्गीय अरुण उपाध्याय को दमदारी से लखनऊ विश्वविद्यालय का चुनाव लड़ाया ।
चुनाव में सफलता भले न मिली हो लेकिन 1990 के दशक में हजारों नौजवानों का हुजूम साथ हो लिया । लोकप्रियता ऐसी की तमाम अखबारो और मैगजीनों ने जगह दी । छात्र जीवन में कुछ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए जो समय के साथ खत्म हो गए ।
गैर राजनीतिक परिवार से आने वाले 26 वर्षीय नवजवान का आत्मबल ऐसा कि जनपद जौनपुर के मल्हनी से चुनाव लड़े और 2002 में निर्दल विधायक निर्वाचित हो गए । विधायक हुए तो खुले मंच से घूसखोर दलालों मुर्दालो को चेतावनी दे डाली सुधर जाओ नही तो हम सुधार देंगे ।
धनंजय सिंह नाम केवल विधायक या सांसद के लिए नही जाना जाता । यह नाम हर उस गरीब वंचित शोषित असहाय पीड़ित लोगों के लिए संजीवनी से कम नही है । जिसे कही भी सहारा नहीं मिलता ।
जनपद जौनपुर के बनसफा के मूल निवासी धनंजय सिंह पढ़ाई पूरी किए तो पिता ने कहा नौकरी कर लो । उन्होंने नौकरी करने से साफ मना करते हुए कहा कि हम नौकरी करने के लिए नही बने हैं । हम भविष्य में नौकरी देने का काम करेगे ।

इस आत्म विश्वास का कारण था छात्र जीवन में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी से मुलाकात उनका आशीर्वाद और उनके सानिध्य ने धनंजय सिंह के मन में ऐसा राजनीतिक बीज रोपित किया जो अब बड़ा होकर जनसेवा और जनसमर्पण के लिए पूर्णरूप से तैयार था ।
पिता की पहल पर मिलने वाली नौकरी को त्याग कर एक बार अपने क्षेत्र में राजनीतक मौजूदगी दर्ज कराने पूरे आत्मविश्वास के साथ निकल पड़ता है । लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने क्षेत्र में आते हैं । वर्ष 2002 में निर्दल चुनाव जीत कर विधायक बन जाते है ।

दुबारा 2007 में निर्दल विधायक वर्ष 2009 में देश की सर्वोच्च पंचायत लोकसभा में पहुच जाते है । कई सहयोगियों को विधान परिषद तो कई को ब्लाक प्रमुख निर्वाचित करा देते है । यह 20 वर्षो का शानदार राजनैतिक सफर बहुत ही चौकाने वाला रोमांचित कर देने वाला है ।
वर्ष 2009 में सांसद निर्वाचित हुए तो जनपद के मान सम्मान को बढ़ाया लोकसभा सभा मे दिए भाषणों को देश के बड़े नेताओं ने खूब सराहा । वर्ष 2010 में विधान परिषद के चुनाव होने वाले थे ।

विधान परिषद के लिए प्रभावती पाल को लड़ाने का फैसला लिया और जीता कर सदन भेजा । इतनी आसानी से विधान परिषद चले जाना यह प्रभावती पाल के लिए भी एक आश्चर्य से कम नही था ।
अभी हाल ही में अध्यक्ष जिला पंचायत के चुनाव सम्पन्न हुये है । एक बार पुनः अपनी पत्नी को निर्दल ही जिला पंचायत अध्यक्ष जौनपुर निर्वाचित करा कर अपने राजनैतिक कौशल का लोहा मनवाया ।
धनंजय सिंह पुर्वांचल में उन तमाम राजनैतिक हस्तियों के लिए एक नज़ीर भी है जिनका मानना है कि बिना दल के कुछ भी संभव नही है । अब यह विराट व्यक्तित्व देश में किसी परिचय का मोहताज नही रहा ।
कई बार जेल गए मुकदमे झेले अपने विरोधियों के निशाने पर रहे । हत्या की नियत से वाराणसी में सरे बाजार गोलियों से भुनने का प्रयास किया गया ।
लेकिन बिना डरे बिना सहमे एक सूत्रीय कार्यक्रम अपनी सम्मानित जनता के लिए ईमानदारी से उनके दुख-सुख में खड़े रहे ।
लेकिन अपनी जनपद के जनता के लिए आवाज बुलंद करने वाला नेता देखते-देखते राजनीतिक दलों के नाम पर सियासत करने वाले छुटभैया सियासतदारो को खटकने लगा ।
लेकिन धनजंय सिंह ने कभी इसकी परवाह नही की । पूछने पर कहते है कि मैं राजनीति में कुछ लोगो को खुश करने के उद्देश्य से नही आया हूँ । मेरे लिए सदैव से सर्वोपरी मेरी सम्मानित जनता है ।
अब जनपद जौनपुर को एक ऐसा जुझारू नेता मिल चुका था जो शासन सत्ता सरकारो से लड़ कर जनहित के मुद्दे पर अपनी बात मनवाता चाहे वह सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा कोई काम रहा हो ।
क्षेत्र के हजारों गरीब परिवार की बेटियों की शादी कराते रहे है । हजारो नवजवानों को नौकरी दिलाई । अनेको परिवार को गंभीर बीमारी में चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई । एक ऐसा नेता जो सुबह से शाम तक अपने जनता के बीच रहता । उनके दुख-सुख को सुनता और निवारण करता ।
आज के दौर में राजनीति गरीब गुरबों की सरपरस्ती से कही दूर जाकर अमीरो की शौक और शाही परस्त हो चुकी हो उस दौर में यह अपने मिट्टी और जमीन से जुड़े रहे । अपने लगन मेहनत और समर्पण के दम पर यह जननेता लोगों के दिलो पर राज करता है ।
धनंजय सिंह एक बार फिर 2022 में अपनी मल्हनी की सम्मानित जनता के लिए मैदान में होंगे और जीत भी सुनिश्चित होगी ?
धनंजय सिंह एक नाम नही स्वयं में एक आंदोलन है ।
सांसद जी आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आपको बहुत बहुत बधाई । आप ऐसे ही जनसेवा में व्यस्त रहिये मस्त रहिये स्वस्थ रहिये । ईश्वर से यही कामना है ।
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