सरायख्खाजा जौनपुर। पूर्वांचल का किसानों का ऐतिहासिक भादौंछठ मेला इस बार करोना वायरस महामारी के कारण लाक डाउन के चलते नहीं लगेगा। यह मेला सैकड़ों वर्ष पूर्व से सरायख्खाजा में हरतालिका तीज पर्व के बाद पड़ने वाले रविवार को भादों छठ में लगता है।
बताया जाता है कि मुग़ल बादशाह ने सरायख्खाजा में डेरा डाले था और उसके शरीर में सफेद दाग (कोढ़) हुआ था घ््गाव के पक्के पोखरे में रविवार के दिन भादोछठ के दिन न हां लिया और उसके शरीर से दाग कोढ़ खत्म हो गया।उसी साल से पक्के पोखरे में तीज के त्यौहार के बाद रविवार को श्रध्दालु हजारों की संख्या में सूरज उगने से पहले स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करते हैं और दान करतें हैं।
हरायख्खाजा का ऐतिहासिक भादौंछठ किसानों का मेलालगता है इस मेले में किसानों के कृषि उपकरण तथा कानपुर के चमटा उधोग एवं फिरोजाबाद जिले की गौरवशाली इतिहास के चूड़ियों की दूकानों व निजामाबाद आजमगढ़ के मिट्टी के बर्तन तथा किसानों के हल जुआठ हंसिया खुरपी के अलावां बैल घोड़े भी बिकते थे लेकिन इस बार कोविड19 कोरोनावायरस महामारी से लाक डाउन हैं।
सरकार भी इस तरह के कार्यक्रम पर रोक लगाये हुए हैं सरायख्खाजा का ऐतिहासिक भादौंछठ किसान मेला आजादी के बाद पहली बार नहीं लगेगा।इस सम्बन्ध में थाना प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया कि शासना देश के अनुशार ऐसे किसी भी कार्यक्रमों पर रोक लगाया गया है।












