जौनपुर। लोकहित के मामलों में दलीय सीमा से ऊपर उठकर उमानाथ सिंह कार्य करते थे। उक्त विचार पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने तिलकधारी महिला महाविद्यालय में आयोजित सह संस्थापक उमानाथ सिंह की जयंती एवं नव सत्रारम्भ समारोह में मुख्य अभ्यागत के रूप में व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री स्व. उमानाथ सिंह जनता के दुख-दर्द को गहराई से समझते थे। एक संस्मरण के माध्यम से उन्होंने बताया कि सन् 1988-89 में वे राजस्व मंत्री थे। तब उमानाथ सिंह ने उन्हें बताया कि राजेपुर गांव जहां त्रिमुहानी का मेला लगता है, वह स्थान केराकत तहसील में पड़ता है। नदी पार करके वहां जाने में कठिनाई होती है। मैंने भाई उमानाथ सिंह के कहने पर राजेपुर गांव को सदर तहसील में मिलवा दिया।
समारोह में भाजपा नेता दिनेश सिंह बब्बू ने कहा कि तिलकधारी सिंह इण्टर कालेज में छात्रसंघ का चुनाव लड़ते समय मेरे पिता मुझे रोक रहे थे परन्तु उमानाथ सिंह ने उन्हें समझा-बुझाकर शान्त किया। पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिहं ने संस्मरण के माध्यम से बताया कि जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ उमानाथ सिंह मुम्बई गये तो वहां उमानाथ सिंह ने अपने लोगों को बुलवाकर कल्याण सिंह का भव्य स्वागत कराया। मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में उमानाथ सिंह का प्रभाव देखकर स्तब्ध रह गये।
महाराष्ट्र के उद्योगपति शमशेर सिंह ने कहा कि सन् 1985 में नगर महापालिका के चुनाव के समय उमानाथ सिंह मुम्बई गये थे। वहं कांग्रेस के कृपाशंकर सिंह जैसे नेताओं ने भाजपा नेता उमानाथ सिंह को कई बैठकों में आमंत्रित किया। पूर्व प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह ने कहा कि विज्ञान का सिद्धांत है कि क्रिया की प्रतिक्रिया होती है परन्तु उमानाथ सिंह इसके अपवाद रहे। वे विरोधियों का भी आदर करते रहे।
भाजपा नेता राज बहादुर सिंह ने कहा कि स्व. उमानाथ सिंह कुशल प्रशासक थे। मंत्री रहते हुये सचिवालय की फाइलों में जो टिप्पणी वे लिखते थे, अन्य मंत्रियों के लिये वह नजीर बन जाती थी। तिलकधारी महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डा. माधुरी सिंह ने ‘लीक छोड़ि तीनों चलैं सायर, सिंह, सपूत’ पंक्ति के माध्यम से उन्हें सच्चा सपूत बताया। अधिवक्ता काली प्रसाद सिंह ने ‘जस की तस धरि दीन्हीं चदरिया’ उक्ति के माध्यम से उमानाथ सिंह के बेगाग व्यक्तित्व को रेखांकित किया। अधिवक्ता दुष्यंत सिंह ने कहा कि आज की राजनीति में दूसरे दलों के लोगों को शत्रु समझा जाता है परन्तु उमानाथ सिंह दूसरे दलों के लोगों की मदद बिना भेदभाव के करते थे।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में पूर्व कुलपति प्रो. कीर्ति सिंह ने स्व. उमानाथ सिंह को विलक्षण प्रतिभा का धनी बताया। उन्होंने प्रदेश में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना पर बल दिया। अभ्यागतों के प्रति आभार ज्ञापित करते हुये महाविद्यालय के प्रबन्धक अशोक सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि तिलकधारी महाविद्यालय के छात्र जहां भी जिन पदों पर गये हैं, वहां अपनी विशिष्ट पहचान बनाये हैं। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि तिलकधारी महिला महाविद्यालय की छात्राएं जहां भी जायं, वहां अपनी छाप छोड़ें। प्रबन्धक ने शिक्षा के साथ संस्कार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के आरम्भ में प्राचार्या डा. वन्दना सिंह ने महाविद्यालय के प्रगति आख्या प्रस्तुत की। इस अवसर पर अभ्यागतों द्वारा पौधरोपण भी किया गया। उक्त अवसर पर डा. धर्मराज सिंह, पूर्व प्रमुख सुरेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व न्यायिक मजिस्टेªट विनय कुमार, संजय सिंह, प्रमोद सिंह, प्रो. शिव प्रसाद सिंह, पूर्व प्राचार्य डा. अरूण सिंह आदि उपस्थित रहे।











