जौनपुत में घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिए श्रद्धालु, देखें ताजा तस्वीरें
संकल्प सवेरा जौनपुर डाला छठ पर कुंडों और तालाबों पर आधी अधूरी तैयारी के बीच अर्घ्य दिया गया। चार दिवसीय महापर्व के तीसरे दिन बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया।
शहर के गोमती नदी के विसर्जन घाट सूरजगढ़ गोपी घाट समेत अनेकों कुंडों पर डाला छठ पर सूर्योपासना होती है,
जौनपुर में छठ का पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जाता है, ये पर्व चार दिनों तक चलता है।
आज आज लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दे रहे हैं। बता दें, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का समय शाम में 4:30 से 5:26 बजे के बीच है।
वहीं कल उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने का समय सुबह 6:34 बजे से है। जिसके साथ ही छठ महापर्व समाप्त हो जाएगा।
यहां देखिए ताजा तस्वीरें
आपको बता दें, शाम में अर्घ्य गंगा जल से दिया जाता है। जबकि उदयगामी सूर्य को अर्घ्य कच्चे दूध से देना चाहिए। आचार्य राजनाथ झा के अनुसार,
भारतीय सनातन धर्म में सूर्य उपासना का विशेष पर्व छठ है। ये पर्व पूर्णत: आस्था से जुड़ा है।
छठ घाट जाने के लिए व्रती महिलाए घर से निकली
लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के लिए अपने-अपने घरों से व्रती महिलाएं छठ घाट के लिए निकल चुकी हैं।
आस्था का महापर्व के दौरान अस्ताचलगामी सूर्य की अर्घ्य देकर महिलाएं सूर्य की उपासना करेंगी। इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए। महिलाएं तरह-तरह की मनोकामनाएं लेकर घाट तक पहुंच रही हैं। छठी मैया को ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा,
चावल का बना लड्डू, जिसे लडुआ भी कहते हैं आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। छठी मैया की कथा सुनते हैं । छठी तिथि को शाम को अर्घ्य के बाद रात को सूर्य देवता का ध्यान और छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।
इसके बाद सुबह सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सभी घाट पर पहंचते हैं। सप्तमी तिथि को सुबह सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रत का पारण करते हुए व्रत खोला जाता है।












