लखनऊ,संकल्प सवेरा यूपी विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ के संबोधन के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सदन में कह रहे हैं कि पटककर मारना चाहिए, ये सरकार के मुखिया की भाषा है. हम ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करते. वहीं लैपटॉप के सवाल पर अखिलेश यादव ने कह कि मुख्यमंत्री को लैपटॉप चलाना नहीं आता.
अखिलेश यादव ने कहा कि आज जब मैं सीएम का भाषण सुन रहा था, वो ऐसे जवाब दे रहे थे, जैसे पिछले 4 साल में सरकार ने दायरे और मर्यादा में रहकर काम किया हो. इंस्टीट्यूशन का जितना नुकसान बीजेपी ने किया उतना किसी ने नहीं किया. बीजेपी यूपी दिल्ली सरकार की नकल करती है, ऐसे ही कृषि बिल को लोकसभा में पारित होने के बाद यूपी में किया. बीजेपी यूपी सदन में बहुमत के खिलाफ़ जाकर बिल पास कराए. कल सभी एमएलसी सदन में धरने पर थे, लेकिन तब भी सारे बिल पास कर दिए, जबकि यहां के सदन में बहुमत विपक्ष का है.
अखिलेश यादव ने कहा कि ये सरकार उत्तर प्रदेश की जनता का अपमान कर रही है. पूरे के पूरे बिल बिना बात सुने पास करा दिए गये हैं और ये बात कर रहे हैं परम्परा की. जैसे दिल्ली की सरकार 5 ट्रिलियन अर्थव्यस्था की बात कर रही है वैसे ही नकल रहते हुए उप्र की सरकार ने 1 ट्रिलियन की बात की थी. पर इस बार किसी ने नाम नहीं किया. न केंद्र सरकार ने 5 ट्रिलियन की बात की और उप्र की सरकार ने 1 ट्रिलियन की बात की. ये लोग सतत विकास की बात करते हैं. पर अर्थव्यवस्था के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इन्होंने क्या किया? विकास के लिए क्या किया?
जो संकल्प पत्र भूल गए, उनसे क्या उम्मीद
अखिलेश ने पूछा कि कोई बढ़ा विकास दिख रहा हो तो बताइए. जो लोग संकल्प पत्र को भूल गए. उस सरकार से आप क्या उम्मीद करेगें? ये पहली सरकार है, जो शिलान्यास का शिलान्यास करती है, उद्घाटन का उद्घाटन करती है. जनता को बताएं कि इन्वेस्टमेंर मीट से कितना निवेश आया? जिस पटल पर ये बताना चाहिए कि इतना निवेश आया वो वहां बतायें.
ये सरकार के मुखिया की भाषा है
उन्होंने कहा कि वो सदन में कह रहे हैं कि पटककर मारना चाहिए, ये सरकार के मुखिया की भाषा है. यहां पर सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है एक्सप्रसवे का, क्या उनके संकल्प पत्र में ये सब था? क्या उप्र में सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट लग रहा था? अब कितना लग रहा है. सीएम के मुंह में पटककर मारना, ठोंकना आता है. पर बिजली, थर्मल प्लांट जैसे शब्द नहीं आते हैं.
एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट किसके हैं?
अखिलेश ने पूछा कि हेल्थ सेक्टर में कितना काम किया इन्होंने? कह रहे हैं कोविड-19 में कितने झंडे गाढ़े हैं इन्होंने. क्या सरकार ने कोविड के समय मजदूर की मदद की. एक भी मजदूर की मदद नहीं की. मैं सरकार से जानना चाहता हूं क्या एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट उनके हैं? क्या उनका जिक्र उनके प्रस्ताव पत्र में था. मैं सीएम से जानना चाहता हूं कि उनके मुंह से ‘पटकना, ठोकना’ सुनाई पड़ता है लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर या सोलर एनर्जी क्यों नहीं सुनाई पड़ता?
क्या covid19 में सरकार ने श्रमिकों की मदद की थी? क्या उनको खाना दिया था? क्या सरकार को याद है कि लॉकडाउन की वजह से कितने लोगों की जान गई? क्या सरकार ने अपना दुख जताया कभी सदन में? covid-19 में 90 लोगों की जान गई यूपी में, समाजवादी सरकार ने उन 90 परिवारों की मदद करी और 1 लाख की आर्थिक सहायता दी है.
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सभी मर्यादाओं को तोड़ दिया
अखिलेश यादव ने कहा कि आज मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सभी मर्यादाओं को तोड़ दिया है. मुख्यमंत्री ने सभी सीमाओं को तोड़ा. संवैधानिक संस्थाओं को सबसे ज़्यादा नुकसान बीजेपी ने किया है. बीजेपी ने कई विधेयक को ज़बरदस्ती पास करवा लिया. विधान परिषद में बहुमत में विपक्ष है लेकिन उनको नहीं सुना गया. ये बात कर रहे हैं परंपरा की और खुद सारे कानून तोड़ रहे हैं. सदन में तर्क पूर्ण कोई बात नहीं की गई.
प्रियंका के दौरों पर बोले अखिलेश…
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के दौरों पर अखिलेश यादव ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की जनता विकास खुशहाली की राजनीति करेगी. इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर अयोध्या में किसानों की ज़मीन जो अधिग्रहित हो रही है उसको 6 गुना मुआवजा देंगे. न्यूज़ सोर्श न्यूज़ १८ हिंदी












