भगवान के दर्शन के लिए उम्र बाधक नहीं – पंडित सर्वेश प्रपन्नाचार्य जी महराज
संकल्प सवेरा मुंगराबादशाहपुर, जौनपुर। भगवान ने श्री ध्रुव जी को कम अवस्था में ही दर्शन दिया। श्री ध्रुव जी ने सौतेली माता सुरुचि के द्वारा अपमान से व्यथित हो कर पाँच वर्ष के आयु में हो गृह त्याग करके वन चले गए वन में उन्होंने 5 महीने तक कठोर साधना किया। जिसके फलस्वरूप भगवान ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया दर्शन दे करके श्री ध्रुव जी को पृथ्वी में 36000 वर्ष राज करने का अधिकार प्रदान किया।
ये बाते सरोखनपुर में आयोजित श्रीमद्भगवत भागवत महापुराण के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्तों को सम्बोधित करते हुए प्रयागराज से पधारे कथा व्यास प 0 सर्वेश्वर प्रपन्नाचार्य जी महराज ने कही।
उन्होने कहा कि ध्रुव जी ने मृत्यु के सिर पर पैर रखकर के विमान पर बैठकर भगवान के धाम को गए। ग्लानि में आने आत्महत्या न करके भगवान के नाम का आश्रय लेना चाहिए। श्री पृथु जी ने भगवान से भगवान की ही कथा सुनने के लिए अपने कानों में 10000 कानो की शक्ति माँगी जिसके कान समुद्र के समान है
एवं भगवान की कथा नदी के समान में जैसे समुद्र में नित्य नदी मिलती है पर समुद्र कभी भरता नहीं उसी तरह जिनके कान भगवान की कथा सुनने के लिए सदा लालायित रहते हैं. उन भक्तों के ह्रदय में सदा भगवान निवास करते है। कथा के मुख्य यजमान कृष्ण चंद दुबे तथा आयोजक प्रमोद कुमार दुबे है।
कथा में हरिशंकर तिवारी, सूर्यप्रकाश उपाध्याय, राकेश मिश्रा, राहुल सिंह, विशाल सिंह, चन्दन सिंह, रमेश सिंह, रवि शुक्ला, अनिल चौबे, विजय दूबे,महेंद्र श्रीवास्तव, अनिता दुबे, उमा तिवारी, पूनम, बीना मिश्रा, शशी तिवारी, आदि लोग मौजूद रहे।












