कवि सम्मेलन में कवियों ने भरा देशभक्ति का जज्बा
संकल्प सवेरा,जौनपुर.वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी भवन में बुधवार की देर शाम तक चले कवि सम्मेलन में विद्यार्थियों,शिक्षकों एवं कविगण की देशभक्ति केंद्रित रचनाओं से श्रोतागण झूम उठे। कवि सम्मेलन का आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव हर घर तिरंगा कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया।
कवि सम्मेलन की मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी ने कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव में जन जन में एक नई ऊर्जा देखने को मिली। लहराते तिरंगे के पीछे बहुत से बलिदानों की कहानी है। उन्होंने इस अभियान को जन जन तक पहुंचाने में केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका की सराहना की तथा इस अवसर पर कारगिल के जवानों के दर्द को भी गीत के माध्यम से सुनाया।
कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि कवि सितारों में सूर्य की तरह होते है। उन्होंने अपनी रचना कौन सी कविता होती है पूरी, सदा रहती है अधूरी, इच्छाओं की तरह……सुना कर खूब तालियां बटोरी।
डॉ. पी. सी विश्वकर्मा ने देशभक्ति रचना सरहद पर लड़ने वालों का दुनिया में नाम है, भारत के इन सपूतों को मेरा सलाम है…बड़े जोश के साथ सुनाया।
कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने कहा कि रूस और यूक्रेन युद्ध के समय तिरंगे की ताकत पूरी दुनिया ने देखा। मिल जुल कर रहेगा प्यारा यह हमारा देश, होने वाला कभी नहीं यहा पर दंगा…. सुनाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
गिरीश श्रीवास्तव ‘गिरीश’ ने बड़े रोचक अंदाज में हिन्द के वासी है हम, हर दिल में हिंदुस्तान लिख दो…सुनाया। डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने मैं देशभक्त का परचम हूँ, मैं आज़ादी का राग हूँ, मैं जलियावाला बाग हूँ….सुनाया। लोक भाषा में देश के जवानों की ताकत बया की। कवि डॉ. प्रतीक मिश्र ने कदम से कदम मिलाते चलो के साथ कई रचनाएँ सुनाई।
एचआरडी विभाग के विद्यार्












