*वैश्विक वैज्ञानिक मंच पर भारत की गौरवपूर्ण उपलब्धि: डॉ. कृष्ण कुमार यादव लगातार पाँचवीं बार विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल*
सिकरारा : क्षेत्र के देहजूरी गांव निवासी ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी तथा Elsevier B.V. द्वारा प्रकाशित विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची डॉ. कृष्ण कुमार यादव ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने इस वर्ष पहली बार करियर-लॉन्ग डेटा तथा लगातार पाँचवीं बार सिंगल-ईयर डेटा श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। शोध के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय डॉ. यादव के शोध-पत्रों को दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा व्यापक रूप से उद्धृत किया गया है। उनके उत्कृष्ट शोध कार्य और वैश्विक स्तर पर बढ़ते शोध-प्रभाव ने उन्हें प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की सूची में स्थान दिलाया है। यह उपलब्धि उनके निरंतर उत्कृष्ट शोध एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक योगदान को दर्शाती है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर द्वारा संयुक्त रूप से तैयार ‘विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों’ की सूची Scopus डेटाबेस में दर्ज शोध पत्रों, उद्धरणों, h-index, सह-लेखन और लेखक की भूमिका जैसे कठोर मानदंडों पर आधारित एक प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग है। यह सूची वैज्ञानिकों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करती है: ‘करियर-लॉन्ग रैंक’, जो पूरे शोध करियर के संचयी प्रभाव को दर्शाती है, और ‘सिंगल-ईयर रैंक’, जो केवल एक विशिष्ट वर्ष (जैसे 2025) के शोध प्रभाव को मापती है। 22 वैज्ञानिक क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों में यह उपलब्धि शोध की गुणवत्ता और निरंतरता का प्रमाण मानी जाती है, विशेषकर पर्यावरण विज्ञान जैसे क्षेत्रों में जहां नए ज्ञान का सृजन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में पिछले एक दशक से अधिक समय से सक्रिय डॉ. कृष्ण कुमार यादव ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे अब तक 400 से अधिक शोध आलेख, 14 पुस्तक अध्याय और 6 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उनके नाम 6 जर्मन पेटेंट और 4 यूके पेटेंट डिजाइन भी दर्ज हैं। उनके शोध कार्यों को विश्वभर के वैज्ञानिकों द्वारा व्यापक रूप से उद्धृत किया गया है। गूगल स्कॉलर पर 22,322 से अधिक उद्धरण, 76 का h-इंडेक्स और 268 का i10-इंडेक्स उनके वैश्विक शोध-प्रभाव को दर्शाते हैं।
डॉ. यादव वर्तमान में मध्यांचल विश्वविद्यालय, भोपाल में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एडजंक्ट एवं विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में शोध सहयोग और युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। हाल ही डॉ. यादव का चयन दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ जोहान्सबर्ग के डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड बिल्ट एनवायरनमेंट, डोर्नफॉन्टेन कैंपस में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में हुआ है। वे कई अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में संपादकीय दायित्वों के साथ-साथ समीक्षक के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
उनका शोध फ्लोराइड प्रदूषण, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन, प्लास्टिक प्रदूषण, भारी धातुओं तथा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर उनके प्रभाव जैसे समसामयिक विषयों पर केंद्रित है। दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, सऊदी अरब, मलेशिया, वियतनाम, यूके, अमेरिका सहित कई देशों के वैज्ञानिकों के साथ उनका शोध सहयोग उनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को दर्शाता है। उनका शैक्षणिक शोध और नवाचारपूर्ण कार्य न केवल वैज्ञानिक जगत को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अनगिनत छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहा है।













