“एक पल ही जियो, फूल बनकर जियो,
शूल बनकर ठहरना नहीं जिंदगी” के रचनाकार डॉ. क्षेम को 104वीं जयंती पर किया जाएगा याद

जौनपुर: संकल्प सवेरा 1 सितंबर, हिन्दी साहित्य के यशस्वी कवि, साहित्य वाचस्पति एवं गीतकार डॉ. श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’ की 104वीं जयंती पर 2 सितंबर को जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साहित्य प्रेमियों और सामाजिक संगठनों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
डॉ. श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’ का जन्म 2 सितंबर 1922 को जौनपुर मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम स्थित बशारतपुर गांव के एक कृषक परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने राज कॉलेज से माध्यमिक शिक्षा हासिल की और उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र रहे इलाहाबाद में वे साहित्यिक संस्था ‘परिमल’ से भी जुड़े।
डॉ. क्षेम मूल रूप से गीतकार थे। उनके गीतों में प्रेम, सौंदर्य और श्रृंगार की भावनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। उनकी लोकप्रिय रचनाओं में “एक पल ही जियो, फूल बनकर जियो, शूल बनकर ठहरना नहीं जिंदगी” जैसी पंक्तियां आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। महादेवी वर्मा ने उन्हें ‘गीत के राजकुमार’ की संज्ञा दी थी।
साहित्य के साथ-साथ डॉ. क्षेम सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों से भी जुड़े रहे। आपातकाल के दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन ने उन्हें उद्वेलित किया और उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना को लेकर जनगीतों की रचना की। “जभी से जगे रे भाई, तभी से सवेरा है” और “देश के सितारों बलिहारी-बलिहारी है” जैसे गीतों ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।
डॉ. क्षेम ने गीतों के अलावा महाकाव्य और आलोचना साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘कृष्ण द्वैपायन’, ‘छायावाद की काव्य साधना’, ‘छायावाद के गौरव चिन्ह’, ‘नीलम तरी’, ‘संघर्ष तरी’, ‘राख और पाटल’, ‘रूप तुम्हारा प्रीति हमारी’ तथा ‘अन्तर्ज्वाला’ समेत उनकी अनेक कृतियां हिन्दी साहित्य की समृद्ध धरोहर हैं।
हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य संस्थान की ओर से भी उन्हें साहित्य भूषण एवं मधुलिमये पुरस्कार प्राप्त हुआ।
डॉ. क्षेम अपने सहज, सरल और जनसरोकारों से जुड़े व्यक्तित्व के लिए भी याद किए जाते हैं। उनके पास लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते थे और वे शोषित एवं पीड़ित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से मिलकर उनकी मदद करते थे।
2 सितंबर को होंगे कार्यक्रम
डॉ. श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’ की 104वीं जयंती के अवसर पर 2 सितंबर को सुबह 9 बजे जेल के पास स्थित क्षेम उपवन में पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरित किए जाएंगे। वहीं शाम 5 बजे सिद्धार्थ उपवन के सभागार में जन्मदिवस समारोह का आयोजन होगा।
साहित्य जगत में अपने गीतों और रचनाओं के माध्यम से मानवीय मूल्यों की स्थापना करने वाले डॉ. क्षेम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कालजयी रचनाएं और लोकप्रिय पंक्तियां उन्हें साहित्य प्रेमियों के बीच सदैव जीवंत बनाए रखेंगी।












