विद्वानों की परीक्षा होती है श्रीमद्भागवत में: निशान्त पराशर

जौनपुर,संकल्प सवेरा। शस्त्रों की परीक्षा रण में, पत्नी की परीक्षा विपत्ति में होती है तो विद्वानों की परीक्षा श्रीमद्भागवत ग्रंथ में होती है। उक्त उद्गार श्रीमद्भागवत कथा के व्यास निशान्त पराशर ने चांदमारी में शशांकदेव सिंह के आवास पर आयोजित कथा में व्यक्त किया। उन्होंने भक्ति के बारे में चर्चा करते हुए कहाकि ज्ञानी को भगवान नहीं मिल पाते परंतु भक्तों के लिए वे सदैव सुलभ रहते हैं। कथा व्यास ने शबरी माता का दृष्टान्त प्रस्तुत करते हुए कहाकि भक्ति के बिना मनुष्य जलविहीन बादल की भांति होता है।
उन्होंने नवधा भक्ति की अत्यंत सरल एवं मार्मिक व्याख्या करते हुए कहाकि भगवान जाति-पांति कुल और गुणों को नहीं देखते वे केवल भक्ति को ही महत्व देते है। कथा व्यास ने आत्मदेव नामक ब्राहृमण की कथा पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने संगीतमय भजनों कीर्तनों के माध्यम से भक्ति की रसधारा प्रवाहित की जिसमें श्रद्धालुगण डुबकियां लगाते रहे।












