‘मैं अपनी जन्मभूमि का कर्ज तो नहीं चुका सकता, लेकिन अब कुछ तो लौटा सकता हूं’: कृपाशंकर सिंह
रिपोर्ट राजीव पाठक
संकल्प सवेरा, जौनपुर। जब मैं मुम्बई गया था तो कोई सहारा देने वाला नहीं था,विपरीत परिस्थितियों में जूझ कर यहां तक पहुचंने के सफर में स्वयं से एक संकल्प लिया कि अब अपने घर जौनपुर और पूर्वांचल से मुम्बई जाने वालों को बेसहारा होकर भटकना नही पड़ेगा।
मुंबई के एक अनुभवी राजनेता,पूर्व गृह राज्यमंत्री जो महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय का प्रमुख चेहरा हैं, वर्तमान में जौनपुर लोकसभा से भाजपा के प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह ने व्यक्तिगत व राजनैतिक जीवन से जुड़े विषयो पर Sankalp Savera को दिए एक साक्षात्कार में चर्चा करते हुये उपरोक्त जीवन संकल्प को बताया।
कैसा लगा भाजपा द्वारा टिकट की घोषणा पर?
धारा 370 को कश्मीर से हटाने की मोदी की घोषणा सुनने के बाद,कांग्रेस में लम्बा अरसा गुजारने के बावजूद मैं स्वयं को रोक नही पाया और मोदी जी के साथ व समर्थन करते हुए भाजपा से जुड़ गया।उस समय आश्चर्यचकित हुआ जब मुझे उत्तर प्रदेश में अपने गृहनगर जौनपुर से चुनाव लड़ने के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जी का फोन आया। अब मोदी जी के कुशल निर्देशन में अपने जौनपुर को महानगर बनाना है।
आप मुंबई के राजनेता रहे हैं , आपको जौनपुर अपनी जन्मभूमि में वापस क्यों आना पड़ा?
मैं जौनपुर में अपनी जड़ों से कभी नहीं टूटा और ना ही कभी ये साथ टूटेगा। यह मेरी मजबूरी थी कि मैं मुंबई में था। गाँव में रहने की ख़ुशी पुराने दिनों की तरह है जब हम एक महीने की छुट्टियों के लिए आते थे और फिर हर दिन हम अपने प्रवास को बढ़ाने की कोशिश करते थे।
जब पार्टी ने कहा कि आपको जौनपुर से चुनाव लड़ना है, तो मैं फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटने पर अपनी खुशी बता नहीं सकता। मैं अपनी जन्मभूमि का कर्ज़ तो नहीं चुका सकता, लेकिन अब तो कुछ लौटा ही सकता हूँ।
आपका राजनीतिक आधार मुंबई रहा , तो क्या जौनपुर अधिक चुनौतीपूर्ण होगा?
जौनपुर से मेरा व्यक्तिगत जुड़ाव कभी कम नही था। पहले भी मैं हर दो महीने में अपने जन्मभूमि जौनपुर आता रहा हूं और जो कुछ मैं कर सकता था, मैंने अपने जौनपुर के लिए किया। हालाँकि, यह चुनाव नरेंद्र मोदी जी के लिए है और जब मैं अपने गृहनगर आया हु तो मुझे सभी जातियों और समुदायों से भरपूर समर्थन मिल रहा है। मै लगातार लोगों से मिल रहा हु और सभी ने कहा, उनके पास अपना सांसद नहीं है। स्थानीय नेताओं से मैंने बात की, उन्होंने कहा कि जब भी वे किसी काम के लिए दिल्ली जाते थे , तो उन्हें बताया जाता था कि उनके पास अपना सांसद नहीं है। लोगों को अब पछतावा हो रहा है कि पिछली बार उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार को वोट क्यों नहीं दिया ।
उत्तर प्रदेश में जाति आधारित बड़ी राजनीति है और आपके संसदीय क्षेत्र में यादवों का दबदबा है, इसका क्या असर होगा?
मैं जहां भी गया, राजनीति में जाति आधारित समीकरण नहीं देखा। एक बात तो पक्की है कि मेरे जौनपुर संसदीय क्षेत्र में लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ रहना चाहते हैं। दावा करने वाले कहते होंगे कि यादव समाजवादी पार्टी को वोट देंगे , बाकी लोग बीएसपी को वोट देंगे, लेकिन मुझे पता है कि सभी लोग बीजेपी को वोट देंगे। लोग देश और यूपी दोनों में पिछले दस वर्षों में किए गए कार्यों के लिए मोदी जी का समर्थन कर रहे है।
जौनपुर वालों के लिये आपने मुम्बई में अपना घर निःशुल्क रहने के लिये दे दिया,क्या यह बात सच है?
जब मैं जौनपुर से मुम्बई गया था, तो खार पूर्व में जवाहर नगर के धोबी घाट में एक छोटी सी चॉल में रहता था। उसके बाद जब मैं MLC बना तो मुझे दो कमरों का घर मिला, जिसका इस्तेमाल हम उत्तर प्रदेश के लोगों के रहने के लिए किया करते था, खासकर उन लोगों के लिए जो कैंसर के इलाज के लिए मुंबई जाते थे ।
मैंने सभी उत्तर भारतीयों के लिये अपने घर के दरवाजे पहले भी खोल रखे थे और हमेशा खुला रहेगा। जिन्हें नौकरी नही मिल पाती उनके रोजगार की व्यवस्था,जो इलाज कराने वहां जाते थे, उनके दवा- जांच की सारी व्यवस्था हमारे द्वारा की जाती है।
कवि गुलजार की एक प्रसिद्ध पंक्ति है और मैं खुद को उससे जोड़ता हूं, ” मैं अक्सर मिट्टी पर बैठता हूं, मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है। “













